Kamal Nath: आशा,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बनाएंगे स्थाई कर्मचारी, कमलनाथ का बड़ा एलान

MP By Elections: कमलनाथ ने कांग्रेस सरकार बनने पर संविदा कर्मचारियों और रोजगार सहायकों को नियमित करने का भी किया वादा

Updated: Nov 01, 2020, 04:54 PM IST

Kamal Nath: आशा,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बनाएंगे स्थाई कर्मचारी, कमलनाथ का बड़ा एलान
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भोपाल। आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और रोजगार सहायकों को नियमित सरकारी कर्मचारी बनाया जाएगा, ये बड़ा वादा आज मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उपचुनाव में प्रचार थमने के कुछ ही घंटे पहले किया। कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर ये सभी वादे हर हाल में पूरे किए जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और उनके वेतनमान बढ़ाने का एलान भी किया है। कमलनाथ की यह घोषणा  प्रदेश के उपचुनाव में बड़ा असर डाल सकती है।

कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर संविदा कर्मचारियों और रोजगार सहायकों को नियमित करते हुए इनका मानदेय एवं सुविधाएं नियमित कर्मचारियों की तरह करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में नौकरी से बाहर किए गए संविदा कर्मचारियों को फिर से नौकरी में बहाल किया जाएगा। कमलनाथ ने कहा कि इसके लिए कांग्रेस सरकार के दौरान प्रारंभ की गई निष्कासित वापसी प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस सरकार बनने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं को स्थायी कर्मचारी घोषित करते हुए इनके मानदेय में बढ़ोतरी करने के वादे का एलान ट्विटर पर भी किया है। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका और आशा कार्यकर्ता प्रदेश में आम लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की अंतिम कड़ी हैं, जो दूर-दराज के उन इलाकों में भी लोगों की मदद करते हैं, जहां दूसरी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होती स्वास्थ्य के क्षेत्र में इतना महत्वपूर्ण काम करने के बावजूद सरकार से मिलने वाले वेतन और सुविधाओं के मामले में इनकी स्थिति सबसे खराब है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का यह वादा उनकी हालत में सुधार की नई उम्मीद जगाने वाला है।

गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान की सरकार के राज में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं ने अपने काम को नियमित करने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदेश भर में आंदोलन किया था। शिवराज सरकार ने उनकी मांगों पर तो ध्यान नहीं दिया, उलटे आंदोलन में शामिल कई कार्यकर्ताओं को कानूनी कार्रवाई का सामना ज़रूर करना पड़ रहा है।