रोटी कमाने के लिए जोखिम में जान, वाहनों की ओवरलोडिंग दे रही हादसों को न्यौता

रतलाम में पुलिस की नाक के नीचे हो रही नियमों की अनदेखी, ओवरलोडिंग कर जानवरों की तरह भरे जा रहे मजदूर, छत पर लटककर पार कर रहे 40-50 किलोमीटर का सफर

Updated: Sep 30, 2021, 06:55 PM IST

रोटी कमाने के लिए जोखिम में जान, वाहनों की ओवरलोडिंग दे रही हादसों को न्यौता
Photo Courtesy: Patrika

रतलाम। जिले के ग्रामीण अंचलों से बदहाली की तस्वीरें सामने आई हैं। यहां आदिवासी मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। नामली इलाके में मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। गाड़ियों में ओवर लोडिंग कर मजदूरों को बैठाया जा रहा है। मजदूरों की मजबूरी है कि उनके पास ज्यादा पैसे नहीं है कि वे महंगा किराया चुका सकें इसलिए वे जान जोखिम में इसलिए डाल रहे हैं कि 1-2 रुपए के किराए में उनका काम हो जाएगा। मजदूरों के साथ महिलाओं और बच्चे भी खेतों पर काम करने जाते हैं। दरअसल इनदिनों खेतों से सोयाबीन की कटाई का काम जारी है, सार्वजनिक वाहन नहीं मिलने पर मजदूर सस्ते के फेर में निजी लोडिंग वाहनों, आटो, टैक्सी की छत और गेट पर लटककर यात्रा करते हैं। मजदूर दिन भर में 300 रुपए मजदूरी पाने के लिए अपनी कीमती जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।

यहां के इंदौर-नयागांव मार्ग के नामली-पंचेड़ रोड पर वाहनों में ओवर लोडिंग की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। लेकिन पुलिस ने किसी भी वाहन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। मजदूरों को गाड़ियों में जबरन ठूस-ठूसकर बैठाने से हादसे की आशंका बनी रहती है। ये लोडिंग वाहन थानों के सामने से निकलते रहते हैं, पर मजाल है किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश की हो। सैकड़ों मजदूर बारिश के दौरान भी इसी स्थिति में 40-50 किलोमीटर की लंबी यात्रा करते हैं। ये ओवर लोडिंग किसी हादसे की वजह बन सकती है। मजदूरों की मानें तो उनके इलाकों में रोजगार का साधन नहीं है, औऱ ना ही उनके पास गाड़ियों का किराया भरने के लिए पैसे, इसलिए वे सस्ते के चक्कर में जान जोखिम में डालते हैं।

 मजदूरों का कहना है कि नामली से सैलाना के लिए महज दो बसें मिलती है। बस की कमी की वजह से मजदूर मजबूरी में अपनी ही जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। मामला सामने आने पर पुलिस सख्ती की बात कहती नजर आ रही है।