MP में किसान सम्मान निधि बनी किसान अपमान निधि, मोदी शिवराज दोनों झूठे: जीतू पटवारी

शाजापुर के किसानों को मिला 5 करोड़ 60 लाख रुपए का रिकवरी नोटिस, पहले सरकार ने पैसे भेजे, अब अपात्र बताकर वापस मांग रहे: जीतू पटवारी

Updated: Oct 07, 2021, 05:43 PM IST

MP में किसान सम्मान निधि बनी किसान अपमान निधि, मोदी शिवराज दोनों झूठे: जीतू पटवारी

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला है। पटवारी ने ने कहा है कि पीएम मोदी और सीएम शिवराज दोनों झूठे हैं। पटवारी के मुताबिक प्रदेश में किसान सम्मान निधि को किसान अपमान निधि बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2018 की योजना को दुबारा पीएम मोदी के हाथों लॉन्च करवा शिवराज सरकार तमाशा बना रही है।

राजधानी भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में जीतु पटवारी ने आज मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'बीते दिनों सीएम शिवराज ने पीएम मोदी के हाथों से स्वामित्व योजना का शुभारंभ कराया, लेकिन सच्चाई यह है कि इस योजना को साल 2018 में प्रदेश सरकार पहले ही लागू कर चुकी है। इस योजना किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला है। बावजूद शिवराज और मोदी दोनों झूठे मिलकर मध्य प्रदेश को बरगलाने का काम कर रहे हैं।'

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पटवारी ने कुछ डॉक्युमेंट्स पेश करते हुए बताया कि शाजापुर जिले में किसानों को सम्मान निधि के तहत जो राशि दी गई थी अब उसकी रिकवरी के नोटिस किसानों को भेजी गई है। यहां हजारों किसानों को अब तक 5 करोड़ 60 लाख रूपये की रिकवरी के नोटिस भेजे जा चुके हैं। उन्होंने अवंतीपुर बड़ोदिया, गुलाना, कालापीपल, मोहन बड़ोदिया, पोलायकला, शाजापुर और सुजालपुर तहसीलों के उन सभी किसानों की सूची और बकाए का नोटिस भी पेश किया। पटवारी के मुताबिक इन 7 तहसीलों में 1186 किसानों को यह कहकर अपात्र घोषित कर दिया है कि वह आयकर दाता हैं, जबकि 6364 किसानों को अन्य कारणों से अपात्र घोषित कर दिया है।'

BJP का चरित्र किसान विरोधी: जीतू पटवारी

पटवारी ने कहा कि बीजेपी का चरित्र ही किसान विरोधी है। उन्होंने कहा, 'जब पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार के रूप में मोरारजी देसाई की सरकार बनी थी तब किसानों को अपना गन्ना खेत में ही जलाना पड़ा था। आज भी शिवराज सिंह चौहान की 17 साल की सरकार में किसानों के साथ इसी तरह का दुर्व्यवहार हो रहा है। बीजेपी सरकार किसानों को पहले सम्मान निधि के नाम पर पैसा देती है और जब किसान महंगाई और खराब फसल के बीच उस पैसे का उपयोग कर लेता है तो बाद में किसानों को कर्ज के जाल में फंसाने के लिए करोड़ों रुपए की वसूली के नोटिस थमा दिए जाते हैं।'