दिसंबर में 81 फीसदी घटी मंडियों की आय, रीवा संभाग में 97 फीसदी कम हुई आमदनी

मध्य प्रदेश के सातों संभाग की मंडियों के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, कारोबार ठप हो रहा है

Updated: Jan 19, 2021, 06:15 PM IST

दिसंबर में 81 फीसदी घटी मंडियों की आय, रीवा संभाग में 97 फीसदी कम हुई आमदनी
Photo Courtesy : Kisansamadhan.com

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मंडी शुल्क घटाने के फैसले का प्रभाव प्रदेश की मंडियों पर अब साफ़ तौर पर दिखने लगा है। दिसंबर 2020 में पिछ्ले वर्ष की तुलना में प्रदेश के सातों संभाग की मंडियों की आय कुल मिलाकर 81 फीसदी तक घट गई है। दिसंबर 2019 में प्रदेश की मंडियों में 103 करोड़ रुपए की आय हुई थी जो कि दिसंबर 2020 में महज़ 19 करोड़ रुपए तक सीमित रह गई।  

सरकारी वेबसाइट ई अनुज्ञा के अनुसार दिसंबर 2019 में प्रदेश की सातों संभाग की मंडियों में कुल 103 करोड़ 17 लाख 38 हज़ार 677 रुपए की आय हुई थी। लेकिन दिसंबर 2020 में यह आय महज़ 19 करोड़ 99 लाख 85 हज़ार 299 रुपए रही। मोटे तौर पर दिसंबर 2020 के महीने की आय उसके पिछले वर्ष की तुलना में 83 करोड़ रुपये घटी है। 

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आय के मामले में सबसे बुरा हाल रीवा संभाग की मंडियों का है। यहां मंडियों में आय 97 फीसदी तक घटी है। इस मामले इंदौर संभाग की मंडियों में आई गिरावट बाकी जगहों से कुछ कम है। इंदौर संभाग की मंडियों में आय 74.71 फीसदी तक घटी है। जबकि मंडियों की आय सागर में 89.07 फीसदी, जबलपुर में 87.92 फीसदी, भोपाल में 83.18 फीसदी, ग्वालियर में 79.81 फीसदी और उज्जैन में 74.71 फीसदी तक घटी है।

  

आय आवक घटने का कारण क्या है 

दरअसल मंडियों की आय में आई कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घटाया गया मंडी शुल्क है। राज्य सरकार ने नवंबर महीने में मंडी शुल्क एक तिहाई तक घटा दिया। जिसके कारण मंडियों की आय में पहले के मुकाबले भारी कमी आई है। राज्य सरकार द्वारा एक तिहाई मंडी शुल्क घटाने के बाद की स्थिति की बात करें तो 14 नवंबर से 30 नवंबर के बीच महज़ 16 दिनों में मंडियों की आय 53 फीसदी तक घट गई थी। और उसके बाद एक महीने के भीतर मंडियों की आय 81 फीसदी तक घट गई।  

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मंडी बोर्ड एंप्लायीज़ एसोसिएशन मध्य प्रदेश (Mandi Board Employees Association Madhya Pradesh) के प्रांत अध्यक्ष अंगिरा पांडे मंडियों की इस बदतर स्थिति के लिए केंद्र के तीनों कृषि कानूनों और प्रदेश सरकार द्वारा मई महीने में लाए गए मॉडल मंडी एक्ट को ज़िम्मेदार ठहराते हैं। अंगिरा पांडे के मुताबिक मंडियों में आवक के घटने से मंडी के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान तक नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि दिसंबर महीने में प्रदेश की करीबन 150 मंडियों में काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। अंगिरा पांडे कहते हैं कि यह तो पूरी कहानी का सिर्फ एक ट्रेलर भर है। दिसंबर में आय 81 फीसदी घटी है। जनवरी में यह आंकड़ा 90 फीसदी को पार कर जाएगा। अंगिरा पांडे बताते हैं कि करीबन 200 मंडियां जनवरी महीने का वेतन अपने कर्मचारियों को नहीं दे पाएंगी। अंगिरा पांडे ने कहा है कि आने वाले समय में मंडियों की स्थिति और भयावह होनी है। प्रदेश के सात संभागों में कुल 259 कृषि उपज मंडियां हैं।   

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हालांकि मंडियों की यह स्थिति रातों रात नहीं हुई है। हाल ही में ग्वालियर कृषि विपणन बोर्ड के संयुक्त संचालक ने राज्य मंडी बोर्ड, भोपाल को मंडी कर्मचारियों के लंबित वेतन के भुगतान के लिए पत्र भेजा है। पत्र में राज्य मंडी बोर्ड से कहा गया है कि वो पहले से आर्थिक बदहाली झेल रही मंडियों में लंबित वेतन का भुगतान करने हेतु ज़रूरी कदम उठाएं। दरअसल अकेले ग्वालियर संभाग की 16 मंडियां ऐसी हैं जहाँ महीनों से कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ रहे हैं। इन सभी मंडी कमर्चारियों का 4 करोड़ 64 लाख का वेतन बकाया है। खुद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र मुरैना की बानमौर मंडी में तो पिछले 16 महीने से कर्मचारी अपने वेतन भुगतान की राह देख रहे हैं।