भारत में ऐप पर प्रतिबंध की कोशिश के पीछे रिलायंस और मेटा का हाथ, टेलीग्राम CEO का बड़ा आरोप
टेलीग्राम CEO पावेल ड्यूरोव ने रिलायंस और मेटा पर भारत में ऐप ब्लॉक कराने की साजिश का आरोप लगाया है। दूसरी ओर NEET पेपर लीक मामले में केंद्र के अस्थायी बैन के खिलाफ टेलीग्राम दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है।
टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल ड्यूरोव ने रिलायंस समूह और व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि भारत में टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने की कोशिशों के पीछे इन कंपनियों की भूमिका हो सकती है। ड्यूरोव ने यह भी आरोप लगाया कि रिलायंस से जुड़ी एक दूरसंचार इकाई भारत के बाहर विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित कई देशों में लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए टेलीग्राम की पहुंच बाधित कर रही है। इस बीच केंद्र सरकार द्वारा नीट यूजी पुनर्परीक्षा से पहले लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देते हुए टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में ड्यूरोव ने कहा कि रिलायंस कथित रूप से बीजीपी हाईजैकिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर टेलीग्राम की इंटरनेट रूटिंग को प्रभावित कर रही है। उनके अनुसार, इस तरह की गतिविधियां कई शिकायतों के बावजूद जारी हैं। जिससे यह संदेह पैदा होता है कि यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रिलायंस में मेटा की हिस्सेदारी होने के कारण यह मामला व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के बीच कारोबारी प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ा हो सकता है।
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ड्यूरोव ने आगे दावा किया कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा यदि भारत में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने की हालिया कोशिशों के पीछे भी रिलायंस और व्हाट्सऐप की भूमिका हो। उन्होंने वैश्विक इंटरनेट रूटिंग सिस्टम के कथित दुरुपयोग को चिंताजनक बताते हुए नेटवर्क ऑपरेटरों से संदिग्ध बीजीपी घोषणाओं को अस्वीकार करने की अपील की है।
हालांकि, दूरसंचार क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी (नाम ना बताने के शर्त पर) ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया और खारिज कर दिया है। अधिकारी के अनुसार, ड्यूरोव ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की डिजिटल इकाई जियो को लेकर भ्रम पैदा किया है। उन्होंने कहा कि समुद्र के भीतर केबल नेटवर्क का संचालन रिलायंस कम्युनिकेशंस करती है। जबकि, मेटा की हिस्सेदारी जियो प्लेटफॉर्म्स में है। दोनों अलग-अलग कंपनियां हैं और मेटा का जियो के दैनिक संचालन या प्रबंधन में कोई हस्तक्षेप नहीं है। ऐसे में दोनों को जोड़कर आरोप लगाना या तो तथ्यों की गलत समझ को दर्शाता है या फिर भ्रामक जानकारी फैलाने का प्रयास है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार ने नीट यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत आदेश जारी करते हुए गूगल और एप्पल को 22 जून तक अपने ऐप स्टोर से टेलीग्राम हटाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रश्नपत्र लीक के दावों, ऑनलाइन ठगी और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।
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NTA के अनुसार, यह कार्रवाई किसी वास्तविक पेपर लीक की वजह से नहीं बल्कि उन फर्जी चैनलों और समूहों के खिलाफ की गई है जो छात्रों और अभिभावकों से परीक्षा प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की मांग कर रहे थे। एजेंसी ने बताया कि PAPER LEAKED NEET, Re-NEET 2026, Private Mafia और REE NEET MAFIAA जैसे नामों से चल रहे कई चैनल अभ्यर्थियों को गुमराह कर रहे थे।
NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से कराने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि पहले साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की मदद से कई चैनलों और समूहों को हटाने की कोशिश की गई लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर प्लेटफॉर्म स्तर पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
सरकार ने टेलीग्राम को भारत में 30 जून तक पहले से भेजे गए संदेशों को संपादित करने की सुविधा भी बंद करने का निर्देश दिया है। NTA का दावा है कि कुछ मामलों में परीक्षा समाप्त होने के बाद पुराने संदेशों और पीडीएफ फाइलों को एडिट कर उन्हें पहले से लीक हुए प्रश्नपत्र के रूप में पेश किया जाता था। जिसकी वजह से जांच प्रभावित होती है और गलत जानकारी फैलती है।
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सरकारी फैसले के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। मामले का उल्लेख न्यायमूर्ति तेजस करिया के समक्ष किया गया जिन्होंने इस पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी। टेलीग्राम का कहना है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने से करोड़ों वैध उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। जबकि, कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ होनी चाहिए जो वास्तव में फर्जीवाड़े या पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल हैं।
ड्यूरोव ने दावा किया कि टेलीग्राम ने हाल के सप्ताहों में परीक्षा लीक और ठगी से जुड़े सैकड़ों चैनल हटाए हैं तथा एडिट किए गए संदेशों को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए भी बदलाव किए हैं। वहीं, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने भी पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के फैसले की आलोचना करते हुए इसे समस्या का अस्थायी और असंगत समाधान बताया है।
इस बीच NTA ने स्पष्ट किया है कि नीट यूजी पुनर्परीक्षा 21 जून को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी। एजेंसी ने छात्रों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने और किसी भी संदिग्ध ऑफर, पेपर लीक के दावे या ऑनलाइन ठगी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देने की अपील की है।




