खंडहर हो रहा रानी कमलापति का गिन्नौरगढ़ किला, विपक्षी विधायकों को हकीकत देखने जाने से रोका

सीएम शिवराज के विधानसभा क्षेत्र में है रानी कमलापति का किला, किले की दुर्दशा दुनिया के सामने लाने से रोकने के लिए सरकार ने विपक्षी विधायकों को जाने से रोका, टाइगर मूवमेंट का दिया हवाला

Updated: Dec 16, 2021, 03:47 PM IST

खंडहर हो रहा रानी कमलापति का गिन्नौरगढ़ किला, विपक्षी विधायकों को हकीकत देखने जाने से रोका

भोपाल। मध्य प्रदेश में आदिवासी वोटबैंक को रिझाने के लिए रानी कमलापति का नाम इस्तेमाल करने का दांव बीजेपी के लिए उल्टा पड़ गया है। कांग्रेस ने अब आदिवासी महारानी कमलापति के खंडहर में तब्दील हो रहे महल का मुद्दा उठा लिया है। कांग्रेस उनके गिन्नौरगढ़ किले की दुर्दशा दुनिया तक पहुंचाना चाहती है। हालांकि, अब सरकार उन्हें किले तक जाने ही नहीं दे रही है।

कांग्रेस विधायकों ने गुरुवार को इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। दरअसल, विपक्षी दल विधानसभा सत्र में महल के मुद्दे को लेकर रिपोर्ट पेश करना चाहती थी। इसके लिए नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ के निर्देश पर 5 सदस्यीय विधायकों की कमेटी गठित हुई जिसमें सज्जन सिंह वर्मा, औंकार मरकाम, हीरालाल अलावा, पांचीलाल मेणा और बलवीर तोमर शामिल हैं। यह कमेटी बुधवार को खंडहर देखने जा रही थी लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया गया।

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विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने बताया कि उन्होंने वन मंडल अधिकारी, ओबेदुल्लागंज को बीते 13 दिसंबर को आवेदन पत्र दिया था। लेकिन वन मंडल अधिकारी ने बाघ मूवमेंट और बाघ गणना का हवाला देकर कमेटी में शामिल विधायकों को किले पर जाने की अनुमति नही दी। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सरकार आदिवासियों की इस गौरवशाली धरोहर को सहेजने में पूर्णतः असफल साबित हुई है, इसलिए वो किले पर जाने का प्रतिबंध लगाकर इस असफलता को छुपाना चाहती है। 

वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि, 'आदिवासियों के गौरवशाली इतिहास की धरोहर रानी कमलापति के नाम पर की जा रही राजनीति से बीजेपी की चाल, चरित्र और चेहरा पुनः उजागर हुआ है। बीजेपी को पिछले 18 वर्षों से कभी भी रानी कमलापति की याद नहीं आई। उन्होंने सिर्फ राजनीतिक लाभ की दृष्टि से रानी कमलापति के नाम पर स्टेशन का नाम रख दिया। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि रानी कमलापति का गिन्नौरगढ़ किला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाते हुए बदहाली, बेबसी और गुमनामी के साथ बुधनी विधानसभा की सीमा में जर्जर और बेहाल अवस्था में खड़ा है।'

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इस दौरान आदिवासी विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि हम आदिवासियों को हमारे ही स्थल पर जाने से रोका जा रहा है। यह तो एट्रोसिटी एक्ट का उल्लंघन है।सरकार कितने भी प्रतिबंध लगा ले, हमारा संघर्ष जारी रहेगा और हम अपनी रानी की इस गौरवशाली आखिरी धरोहर को यूं मिटने और बर्बाद होने नही देंगे। मरकाम ने बीजेपी पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि रानी कमलापति का असली नाम रानी कमलावती है। जिस तरह हमारे समाज की रानी दुर्गावती थीं उसी तरह उनका नाम रानी कमलावती था न कि कमलापति।