शिक्षा की अलख जगाने में जुटे मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, देवास और सीहोर में बनवा रहे गरीब बच्चों के लिए स्कूल

सीहोर के 650 गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की जिम्मेदारी उठाएंगे सचिन, देवास में बनवा रहे रेसिडेंशियल स्कूल, भावुक होते हुए किया पिता को याद, अगर आज वे होते तो बेहद खुश होते

Updated: Nov 16, 2021, 04:15 PM IST

शिक्षा की अलख जगाने में जुटे मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, देवास और सीहोर में बनवा रहे गरीब बच्चों के लिए स्कूल
Photo Courtesy: naidunia

भोपाल। मध्यप्रदेश के एक दिवसीय दौरे पर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर आए। उन्होंने सीहोर और देवास में सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन द्वारा करवाए जा रहे स्कूल भवनों के निर्माण का जायजा लिया। सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए काम करती है। सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन परिवार नामक NGO के साथ मिलकर मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। NGO परिवार द्वारा मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित दूरदराज के गांवों में सेवा कुटीर बनाए हैं। इन्ही में से एक सेवा कुटिर सेवनिया में मंगलवार को सचिन पहुंचे।

सीहोर में सचिन ने अपनी संस्था द्वारा बनाई जा रही भगिनी निवेदिता विद्यापीठ की निर्माणाधीन बिल्डिंग का जायजा लिया। इस मौके पर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि उनके पिता का सपना था कि समाज के गरीब बच्चों के लिए कुछ किया जाए, भावुक होते हुए सचिन ने कहा कि अगर आज उनके पिता जिंदा होते तो बहुत खुश होते।

देवास के खातेगांव के संदलपुर गांव में भी रेसिडेंशियल स्कूल बनवाया जा रहा है। यहां भी कोलकाता की संस्था परिवार एजुकेशन सोसाइटी उनकी साथ काम कर रही है। सचिन तेंदुलकर का मध्यप्रदेश दौरा गरीब बच्चों की शिक्षा को लेकर काफी अहम माना जा रहा है।

इस दौरे के दौरान सचिन ने अपने फाउंडेशन के लिए मध्यप्रेश में काम कर रही टीम से चर्चा की। सचिन तेंदुलकर ने NGO की मदद से प्रदेश के 42 गांवों में सेवा कुटिर का निर्माण करवाया है। सीहोर केसेवनिया, बीलपाटी, खापा, नयापुरा और जामुन झील के बच्चों को इनका लाभ मिल रहा है। सचिन की संस्था की मदद से गरीब बच्चों को पोषण भोजन और शिक्षा मुहैया करवाई जा रही है। इन गांवों में बरेला भील और गोंड जनजाति के बच्चों को लाभ मिल रहा है। ज्यादातर बच्चे मिडिल स्कूल के छात्र हैं। सेवा कुटिर में छात्रों के भोजन का और शैक्षणिक सामग्री का विशेष ध्यान रखा जाता है। गांववालों का कहना है कि रोजाना यहां बच्चों को दोनों समय भोजन, नाश्ता समेत पोषण आहार दिया जाता है। सचिन तेंदुलकर की जिंदगी में 16 नवंबर का दिन बेहद खास है, इसी दिन साल 2013 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहते हुए सन्यास लिया था।