सीहोर जिले के 30 फीसदी बच्चों के पास मोबाइल नहीं, कैसे पढ़े ऑनलाइन

Online Class: एमपी राज्य शिक्षा केंद्र के अनुसार 30 फीसदी बच्चों के अभिभावकों के पास नहीं है मोबाइल, ऑनलाइन पढ़ाई बनी कोरा दिखावा

Updated: Sep 11, 2020 12:35 PM IST

सीहोर जिले के 30 फीसदी बच्चों के पास मोबाइल नहीं, कैसे पढ़े ऑनलाइन

सीहोर। सीहोर जिले में प्राथमिक और माध्यमिक शाला के 2023 स्कूल हैं। जिनमें करीब एक लाख सात हजार बच्चें हैं। इन बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने का काम शिक्षा विभाग कर रहा है। जिसके लिए कई माध्यमों को उपयोग किया जा रहा है। इसके बाद भी यह सारे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। छात्र न तो ऑनलाइन और ना ही दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाई कर पा रहे हैं।

राज्य शिक्षा केंद्र के ही अनुसार 30 फीसद बच्चों के अभिभावकों के पास मोबाइल नहीं है, जिससे वे बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इनके माता-पिता का कहना है कि गरीब एक बार फिर पढ़ाई से दूर हो गया है। हम अपने खुद ताे पढ़ नहीं सके, लेकिन अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। 

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कोरोना ने हमारे बच्चों से शिक्षा भी छीन ली

हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान के तहत शिक्षा विभाग लगातार छात्रों को शिक्षा देने का प्रयास कर रहा है। जिससे की उनका साल बर्दाद न हो। इसके लिए शिक्षा ने जितने भी प्रयास किए वह नाकाफी साबित हुए हैं। इसको लेकर जब जमीनी हकीकत जानी तो पता चला कि कई छात्र नहीं पढ़ पा रहे हैं। जिसका कारण उनके पास एंड्राइड मोबाइल और टीवी का नहीं होना है। वहीं इनके पालक भी पढ़े लिखे नहीं है। ऐसे में ये छात्र दिन भर खेलकूद में ही समय बर्बाद कर रहे हैं।

ऑनलाइन क्लास कैसे लगे

ऐसा ही एक परिवार शहर के मनुबेन कन्या शाला के पास संजय नगर की झुग्गी झोपड़ी में रहता है। इसके मुखिया हैं उत्तम सिंह और उनकी पत्नी का नाम  रामप्यारी बाई है। उत्तम सिंह लोधी का कहना है कि शिक्षा गरीब से दूर ही रहती है। हम गरीबी के कारण नहीं पढ़ पाए सोचा था बच्चों को तो पढ़ाएंगे पर कोरोना में हमारे बच्चों से भी शिक्षा दूर हो गई है। रामप्यारी बाई कहती हैं कि हमारे पांच बच्चें हैं जो दिनभर मस्ती करते रहते हैं। हमारे पास साधारण फोन है। जिसे जब हम मजदूरी करने जाते हैं तो साथ ले जाते हैं। फोन पर  मैसेज आते हैं तो वो भी हम नहीं पढ़ पाते। हमारा मन था कि बच्चें पढ़ाई करें, लेकिन वो गरीबी के कारण नहीं पढ़ पा रहे। ऐसे जिले में करीब 30 फीसदी  बच्चें हैं। यह आंकड़ा शिक्षा विभाग का ही है उनके सर्वे में उन्हें पता चला है कि जिले के 30 फीसद बच्चे किसी भी माध्यम से पढ़ नहीं पा रहे हैं। 

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नहीं मिला मिड-डे मील 

रामप्यारी बाई बताती हैं कि पहले तो बच्चों को स्कूल में ही भोजन मिलता था। स्कूल बंद हैं तो उन्हें खाने के बजाए अनाज दिया जा रहा था। जो दो माह तक मिला भी बच्चों को एक किलो चावल और दो किलो गेहूं जुलाई में मिला था, लेकिन अगस्त दो माह से राशन नहीं दिया गया है। वहीं कस्बा निवासी दिनेश सिंह का कहना है कि हमें भी मध्यान भोजन नहीं मिल रहा है। 

शिक्षा विभाग ने कहा कि प्रयास जारी हैं 

हालांकि सीहोर के डीसीपी अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि जिन पालकों के पास मोबाइल नहीं है। उन्हें अन्य माध्यमों के माध्यम से पढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। शासन और हमारे स्तर पर पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही मध्यान भोजन समय पर दिया जा रहा है। यदि किसी परिवार को नहीं मिल पा रहा तो स्कूल जा कर संपर्क कर लें।