शिवपुरी टोल प्लाजा पर गार्ड की ट्रक से कुचलकर मौत, कर्मचारी काटते रहे रसीद

काफ़ी देर तक सड़क पर पड़ा रहा गार्ड का शव, ग्रामीणों के हंगामे के चलते तीन घंटे तक जाम लगा रहा, ग्रामीणों ने दो दिन तक वसूले गए टोल की आर्थिक मुआवजे के तौर पर मांग की है

Updated: Jan 23, 2021, 10:19 AM IST

शिवपुरी टोल प्लाजा पर गार्ड की ट्रक से कुचलकर मौत, कर्मचारी काटते रहे रसीद
Photo Courtesy: Dainik Bhaskar

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक दिल दहलाने वाली खबर आई है। शिवपुरी के पूरनखेड़ी स्थित टोल प्लाजा पर ट्रक ने एक गार्ड को कुचल दिया। गार्ड जामल यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जिसके बाद उसका शव काफी देर तक सड़क पर यूं ही पड़ा रहा और टोल प्लाज़ा पर मौजूद कर्मचारी गाड़ियों की रसीदें काटने में लगे रहे। गार्ड को कुचलने वाला ट्रक चालक ट्रक के साथ भाग खड़ा हुआ। हालांकि पुलिस ने पीछा करते हुए ट्रक तो ज़ब्त कर लिया लेकिन ट्रक चालक अब भी पुलिस के शिकंजे से बाहर है। 

मृतक जामल यादव की मृत्यु के बाद ग्रामीणों ने टोल प्लाजा पर जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों के हंगामे और टोल प्लाज़ा में तोड़फोड़ के चलते करीब तीन घंटे तक टोल प्लाज़ा के पास जाम लगा रहा। जब कोलारस थाने की पुलिस टोल प्लाज़ा पर पहुंची, तब कहीं जा कर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। 

ग्रामीणों के मुताबिक शुक्रवार को जामल यादव की शिफ्ट जानबूझकर टोल प्लाजा पर लगाई गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक सुबह 8 बजे से लेकर शाम की 4 बजे तक जामल की शिफ्ट डीसी नाके पर थी। लेकिन जबरन दबाव बना कर जमाल की शिफ्ट टोल प्लाजा पर लगाई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि टोल प्लाज़ा पर काम करने के दौरान उसे हेलमेट भी नहीं दी गई।

टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों की संवेदनहीनता भी हैरान करने वाली है। ग्रामीणों का आरोप है कि दो घंटे तक जामल का शव टोल प्लाजा पर पड़ा रहा। टोल प्लाज़ा के एक भी कर्मचारी ने उसे उठाने की जहमत नहीं उठाई। इतना ही नहीं ग्रामीणों द्वारा तोड़फोड़ करने से पहले तक कर्मचारी रसीद ही काटते रहे। हालांकि प्लाज़ा के एक कर्मचारी का कहना है कि चूंकि जामल का शव बहुत बुरी हालत में पड़ा हुआ था। इसलिए किसी भी व्यक्ति कि शव के पास जाने की हिम्मत नहीं हुई।

ग्रामीणों की मांग है कि दो दिन में टोल प्लाजा द्वारा एकत्रित की गई राशि मृतक के परिजनों को आर्थिक मुआवजे के तौर पर दी जाए, क्योंकि जामल पर अपनी पत्नी और चार बच्चियों के पालन पोषण की ज़िम्मेदारी थी। जामल पर ही पूरे परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारी थी। उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह बेसहारा हो गया है।