MP के दो IAS अफसरों पर 250 करोड़ के घोटाले का आरोप, दिग्विजय सिंह ने EOW को सुबूत भेजकर की कार्रवाई की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने EOW के महानिदेशक को पत्र लिखकर वित्त विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की है, सिंह का दावा है कि IMFS सिस्टम की टेंडरिंग में करीब ढाई सौ करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है।

Updated: Nov 29, 2023, 06:04 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश के दो IAS अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं। सिंह ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को इस संबंध में शिकायती पत्र भी लिखा है। पूर्व सीएम ने इसमें दावा किया है कि IMFS सिस्टम की टेंडरिंग में करीब ढाई सौ करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। सिंह ने इसके साथ ही EOW को सुबूत के तौर पर डील का ऑडियो क्लिप पेश किया है।

EOW के महानिदेशक को संबोधित पत्र में सिंह ने लिखा है कि, 'मध्य प्रदेश में वित्त विभाग के अधिकारियों द्वारा किये गये ढाई सौ करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की ओर में आपका ध्यान आकर्षित कर रहा हूँ। मुझे इस संबंध में एक शिकायत प्राप्त हुई थी। जो पत्र के साथ प्रेषित कर रहा हूँ। इस पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों एवं बातचीत के ऑडियों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर घोटाले में शामिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाना चाहिए। प्राप्त शिकायत के अनुसार राज्य मंत्रालय में लागू आई.एफ.एम.एस. सिस्टम का काम एक चहेती फर्म को देने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों ने वित्त मंत्री को विश्वास में लेकर यह ढाई सौ करोड़ रुपये के घोटाले को विधानसभा चुनाव घोषित होने के कुछ दिन पूर्व अंजाम दिया।' 

सिंह को प्राप्त शिकायत के अनुसार आई.एफ.एम.एस. सिस्टम के काम के लिये पहले तो मनमानी शर्ते डालते हुए टी.सी.एस. जैसी टाटा की विश्व प्रसिद्ध कंपनी को प्रक्रिया से बाहर किया। फिर टेरा सी.आई.एस. टेक्नालॉजीस लिमिटेड, गुडगांव को टेंडर देने के लिये कार्यवाही शुरु कर दी। इस मामले में वित्त मंत्री जगदीश देवडा के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव अजीत केशरी की भूमिका संदिग्ध रही है। शिकायत में आरोप है कि एक अन्य आई.ए.एस. अधिकारी ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी आरोपी कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर घोटाले में शामिल रहे। शिकायत के मुताबिक पहले यह टेंडर 200 करोड़ रुपये का था, जिसे एजेंसी तय होने के दौरान बढ़ाकर 247 करोड़ रुपये कर दिया गया।

सिंह ने शिकायती पत्र में लिखा है कि इस पूरे टेंडर घोटाले में करीब पचास करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। रिश्वत की रकम विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और मंत्री को दी गई है। ए.सी.एस. वित्त अजीत केशरी, ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुक्त कोष एवं लेखा और टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव से काम लेने वाले आंध्र प्रदेश की कंपनी पिक्सल वाईड सॉल्यूशन के डायरेक्टर प्रित्युश जी. रेड्डी के लिए काम करने वाले ग्वालियर निवासी देवेश अग्रवाल के बीच विभिन्न अवसरों पर वाट्सऐप पर हुई चैटिंग पत्र के साथ संलग्न है। पत्र के साथ सी.डी. में संलग्न ऑडियो में वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी हैदराबाद स्थित कंपनी के डायरेक्टर से डील पूरी करने की चर्चा करते सुने जा सकते है। इस बातचीत में डील पूरी न होने पर टाटा कंपनी की टी.सी.एस को आगे काम देने की बात भी कही जा रही है। चर्चा के दौरान किसी पवन नामक व्यक्ति का नाम लेनदेन में बार-बार आ रहा था।

सिंह ने आरोप लगाया है कि करीब पचास करोड़ रुपये का लेन देन करने के बाद वित्त विभाग के अधिकारियों ने आचार संहिता लगने के कुछ दिन पूर्व गुडगांव की कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया। जो बाद में हैदराबाद की कंपनी को सबलेट किया गया। वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस टेंडर प्रक्रिया की शर्तो को इस कंपनी के अनुकूल बनाया था, ताकि अन्य कंपनी भाग ही न ले सके। विधानसभा चुनाव के साल में और चुनाव घोषित हाने के कुछ दिन पूर्व घटित इस हाई प्रोफाईल घोटाले में आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज कर समस्त संबंधित दस्तावेज जब्त किया जाना चाहिए और आरोपी अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों और दलालों के बीच हुई बातचीत का रिकार्ड मोबाईल कंपनियों से लेकर कार्रवाई की जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने EOW के डायरेक्टर से कहा कि यह मामला शीर्ष स्तर के भ्रष्टाचार से जुड़ा है। शिकायत में दिये गये तथ्य बड़े घोटाले को स्पष्ट करते हैं। जिसमें वित्त मंत्री की भूमिका भी संदिग्ध है। शिकायत के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों सहित वित्त विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल है। अतः संलग्न दस्तावेजों एवं ऑडियो के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर भ्रष्टाचार निवारक अधिनियम की तर्क संगत धाराओं में प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाए।