गंजबासौदा हादसा: कुएं से निकाले गए सभी 11 मृतकों के शव, जिस बच्चे को बचाने में हादसा हुआ उसकी भी मौत

24 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, 20 लोगों की जान बचाई गई, कुएं में सबसे पहले गिरे बच्चे रवि का शव सबसे आखिरी में मिला

Updated: Jul 17, 2021, 09:20 AM IST

गंजबासौदा हादसा: कुएं से निकाले गए सभी 11 मृतकों के शव, जिस बच्चे को बचाने में हादसा हुआ उसकी भी मौत

गंजबासौदा।  विदिशा जिले के गंजबासौदा में गुरुवार शाम हुए हादसे के बाद से चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया है। बचाव दल ने कुएं के मलबे में दबे सभी 11 मृतकों के शव बरामद कर लिए हैं। इस ह्रदयविदारक घटना के दौरान कुएं में कुल 31 लोग गिरे थे। जिनमें से 20 को जीवित बचा लिया गया है। हादसे में घायल हुए लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक कुएं में सबसे पहले गिरे 12 वर्षीय बच्चे रवि का शव सबसे आखिरी में मिला, जिसे बचाने के चक्कर में 30 लोग कुएं में गिर गए थे। हादसे में एक बाप-बेटे की भी मौत हुई है। उधर ग्रामीण इस हादसे का ठीकरा जनप्रतिनिधियों पर फोड़ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि लाल पत्थर गांव में यदि पेयजल की व्यवस्था होती तो इतने लोग मौत के मुंह में नहीं समाते।

ग्रामीणों के मुताबिक इस गांव में कहीं भी नलकूप या हैंडपंप की व्यवस्था नहीं है। पीने व अन्य काम के लिए लोगों को एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। स्थिति यह है कि 21वीं सदी में भी यहां पेयजल का मुख्य स्रोत कुआं ही है। जो बच्चा सबसे पहले कुएं में गिरा वह भी पानी लेने ही गया था। यह कुआं करीब 40 फीट गहरा है। उसमें 25 से 30 फीट पानी है। 

इस हादसे के बाद प्रशासन की घोर लापरवाही भी उजागर हुई है। कुएं में सबसे पहले गिरने वाले रवि के पिता के मुताबिक जब 30 लोग गिर गए तो पुलिस को उन्होंने फोन लगाया, लेकिन 2 घंटे बाद 2 पुलिसकर्मी आकर चले गए। डायल 100 को कॉल किया तो कहा गया कि हम दूसरी जगह हैं, आधे घंटे लग जाएंगे। इतना ही नहीं पीड़ित पिता का आरोप है कि जब पुलिस वाले आए तो वे लोगों को बचाने के बजाए चाय-नाश्ता करने लगे।

कमलनाथ ने की पीड़ितों को नौकरी देने की मांग

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने पीड़ितों को नौकरी देने की मांग की है। उन्होंने ट्वीट किया, 'गंजबासौदा कांड में गंभीर लापरवाही सामने आई है। शिकायत मिलने पर पुलिस-प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता तो हादसा टल जाता। जांच में इन पहलुओं को शामिल किया जाए। राज्य सरकार प्रत्येक मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 15 लाख रु. मुआवजा दे। घायलों को 2 लाख रु. मुआवजा दिया जाए।'

विदिशा जिले की बात करें तो देश-प्रदेश की राजनीति के कई दिग्गजों की यह कर्मभूमि रहा है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज, यहां तक कि खुद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी यह निर्वाचन क्षेत्र रहा है। इसी जिले से चुनकर इन दिग्गजों ने देश-प्रदेश में राजनीति की। लेकिन विडंबना यह है कि इसी जिले के इस गांव में हैंडपंप तक कि व्यवस्था नहीं है।