सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने बनाई लाइब्रेरी, कोई भी आकर पढ़ सकता है किताबें

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ जारी आंदोलन में शामिल कई किसान झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का काम भी कर रहे हैं

Updated: Dec 19, 2020, 09:42 PM IST

सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने बनाई लाइब्रेरी, कोई भी आकर पढ़ सकता है किताबें
Photo Courtesy: Navjivan

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने हरियाणा-दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर एक लाइब्रेरी और कल्चरल सेंटर खोल दिया है। जहां कोई भी जाकर किताबें पढ़ सकता है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सुरविंदर सिंह वाडवा के हवाले से इस पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र के बारे में बताया है। 

सुरविंदर सिंह वाडवा की टीम के सदस्य इसके अलावा कुंडली की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का काम भी कर रहे हैं। इसके अलावा किसानों ने ट्रॉली टाइम्स के नाम से हिंदी और पंजाबी भाषा में अपना एक अखबार भी निकालना शुरू किया है। चूंकि मीडिया का एक बहुत बड़ा तबका किसानों की हकीकत बयान नहीं कर रहा था, ऐसे में किसानों ने खुद ही अख़बार प्रकाशित करके किसान आंदोलन से जुड़ी बातों को अख़बार के ज़रिए पहुंचाने की ठानी है। 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी किसान आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है। इस संबंध में छात्रों ने सर सैय्यद डे के मौके पर होने वाले डिनर का पैसा किसान आंदोलन में देने का फैसला किया है। दूसरी ओर यह तैयारी भी चल रही है कि एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की एक टीम दिल्ली जाकर प्रदर्शन कर रहे किसानों की सेवा करेगी। हाल ही में एएमयू के छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल सिंघु बॉर्डर पर किसानों से मिला भी था। किसानों से बात कर हरसंभव मदद के लिए हमेशा साथ होने की बात भी कही थी।