Arnab Goswami: अर्नब गोस्वामी को नहीं मिली जमानत, अब तीसरी रात भी जेल में गुज़ारनी पड़ेगी

शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट से अर्नब को राहत नहीं मिली, कोर्ट ने लंबी बहस के बाद समय के अभाव में सुनवाई टाल दी

Updated: Nov 07, 2020, 08:08 AM IST

Arnab Goswami: अर्नब गोस्वामी को नहीं मिली जमानत, अब तीसरी रात भी जेल में गुज़ारनी पड़ेगी
Photo Courtesy : ABP News

मुंबई। रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को शुक्रवार को भी बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने अर्नब की जमानत याचिका को शनिवार तक के लिए टाल दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अर्नब को अपनी तीसरी रात भी जेल में बितानी होगी। अदालत ने कहा है कि बिना सबको सुने हुए हम कोई आदेश नहीं देंगे। मामले की सुनवाई कल दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। 

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अर्नब के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि मेरा मुवक्किल जेल में है। साल्‍वे ने कहा, 'सीजेएम ने नोट किया कि मामले को फिर से खोलने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। यह कार्रवाई प्रदेश सरकार द्वारा बदले की भावना से की जा रही है।'

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मामले पर हाइकोर्ट ने कहा कि, 'मांगी गई अंतरिम राहत पर विचार करने से पहले हमें सभी संबंधित पक्षों को सुनना होगा। हमें शिकायतकर्ता की भी सुननी होगी क्योंकि मृतक के परिवार ने जांच को स्थानांतरित करने की याचिका दायर की है। हम मांगी गई अंतरिम राहत पर कल गौर करेंगे। बिना सभी पक्षों को सुने हुए कोई आदेश नहीं दिया जा सकता है।'

बता दें कि गोस्वामी ने अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए हाई कोर्ट में इसके खिलाफ एक याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट से यह अनुरोध किया है कि इस जांच पर रोक लगाई जाए और मुझे रिहा किया जाए। अर्नब ने अपने खिलाफ हुई एफआईआर को भी रद्द करने की मांग की है।

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क्या है पूरा मामला

दरअसल, अर्नब की गिरफ्तारी दो साल पहले हुई दो आत्महत्याओं के मामले में की गई है। साल 2018 में 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाईक और उनकी मां कुमुद नाईक ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया था, जो कथित रूप से अन्वय ने लिखा था। इस सुसाइड नोट में लिखा था कि अर्नब गोस्वामी और दो अन्य लोगों ने उनके 5 करोड़ 40 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया, जिस वजह से आर्थिक तंगी का सामना करते हुए उन्हें आत्महत्या का कदम उठाना पड़ रहा है। रिपब्लिक टीवी का दावा है कि ये आरोप गलत हैं।