Bombay HC: तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ FIR रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट ने माना कोरोना फैलाने का कोई सबूत नहीं

Tablighi Jamaat: कोर्ट ने कहा पुलिस ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दर्ज की एफआईआर, क्वारंटाइन सेंटर में कोरोना नेगेटिव पाए गए थे तबलीगी जमात के सदस्य

Updated: Sep-24, 2020, 10:12 PM IST

Bombay HC: तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ FIR रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट ने माना कोरोना फैलाने का कोई सबूत नहीं
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मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने तबलीगी जमात के आठ सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर यह कहते हुए खारिज कर दी कि एक भी ऐसा सबूत मौजूद नहीं है जो यह बताता हो कि इन लोगों ने जानबूझकर कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए कोई कदम उठाया। तबलागी जमात के ये आठ सदस्य म्यामार से आए थे और लॉकडाउन लगने से पहले दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। 

मीडिया के एक समूह ने इस कार्यक्रम मे शामिल हुए लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने वाला बताया था। कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की है जब हाल में ही केंद्र सरकार ने भी राज्य सभा में बताया कि निजामुद्दी मरकज में तबलीगी जमात के सदस्यों के इकट्ठा होने से कोरोना वायरस मामलों में तेज वृद्धि हुई।  

बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस वीएम देशपांडे और जस्टिस अमित बी बोरकर की बेंच ने कहा कि इन आठ लोगों पर मुकदमा जारी रखना और कुछ नहीं बस कोर्ट की शक्ति का दुरुपयोग होगा। बेंच ने कहा कि सभी सदस्यों को 24 मार्च से लेकर 31 मार्च तक नागपुर में प्रशासन की निगरानी के तहत क्वारंटीन में रखा गया 

बेंच ने कहा कि टूरिस्ट वीजा में ऐसी कोई शर्त नहीं है जो विदेशी पर्यटकों को भारत आकर किसी धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने से रोकती हो। दूसरी तरफ ये आठ लोग तो कोई स्थानीय भाषा भी नहीं जानते, जिससे उन्होंने धार्मिक प्रचार प्रसार में भाग लिया हो। बेंच ने कहा कि गवाहों के बयानों से पता चला है कि इन सभी आठ लोगों ने अपनी भाषा में कुरान, हदीस पढ़ी और नमाज अदा की। इसलिए इनके ऊपर फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 का उल्लंघन का आरोप सही नहीं है। 

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न्यायाधीशों ने यह भी रेखांकित किया कि तीन अप्रैल के बाद इन आठ लोगों को क्वारंटीन में रखा गया था। जहां इनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया। ऐसे में सवाल ही नहीं पैदा होता कि इन लोगों ने कोरोना वायरस फैलाया। इसलिए इनके ऊपर जानबूझकर बीमारी फैलाने वालीं धाराएं लागू ही नहीं हो सकतीं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एफआईआर दर्ज की।

पिछले महीने बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले में तबलीगी जमात के 25 सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी थीं। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इन लोगों के खिलाफ दुष्प्रचार किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें बली का बकरा बना गया और नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर भारतीय मुसलमानों की चेतावनी दी गई कि उनके साथ कभी भी कुछ भी किया जा सकता है। बीते दिनों मद्रास और अलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया है।