Bullet Train Project: पीएम मोदी का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पांच साल आगे बढ़ा

PM Modi: जापानी कंपनियां नहीं दिखा रहीं रुचि, लागत बढ़ी, कांग्रेस ने कहा प्रधानमंत्री की जिद के कारण प्रोजेक्ट बना खर्च का स्मारक

Updated: Sep 05, 2020 06:04 PM IST

Bullet Train Project: पीएम मोदी का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पांच साल आगे बढ़ा
Photo Courtesy: Amar Ujala

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुप्रतीक्षित अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की राह में बहुत सी अड़चनें आ रही हैं। यह प्रोजेक्ट 2023 के अंत तक पूरा किया जाना है, लेकिन तमाम अड़चनों की वजह से अब यह समयावधि 2028 तक बढ़ा दी गई है। प्रधानमंत्री इसके एक हिस्से को 2022 में देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर खोलना चाहते हैं। हालांकि, लागत में बढ़ोतरी होने, जापानी कंपनियों के रुचि ना लेने और बार-बार टेंडर के रद्द हो जाने के कारण ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने यह जानकारी दी है। 

अखबार के अनुसार इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के साथ अब कई मसले खड़े हो गए हैं और अगर इनका निपटारा हो जाता है तो बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की नई समयावधि को कुछ कम किया जा सकता है। हालांकि, उनका कहना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट की समयावधि में ज्यादा कटौती नहीं की जा सकती। 

दूसरी तरफ जापान की कंपनियां भी अब इस प्रोजेक्ट में रुचि नहीं ले रही हैं। इस प्रोजेक्ट का निर्माण जापान से 80 फीसदी कर्ज लेकर किया जाना है। जापान ने यह कर्ज 0.1 फीसदी की दर पर 15 साल के लिए दिया है। 11 जापानी कंपनियों ने प्रोजेक्ट के लिए टेंडर की कीमतें करीब 90 फीसदी अधिक बताई हैं, भारत इतनी भारी कीमतें देने के लिए राजी नहीं है। बुलेट ट्रेन के 21 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड रुट के लिए भी इन कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई है। इस 21 किलोमीटर के रूट  में सात किलोमीटर समुद्र के अंदर होगा। इस 21 किलोमीटर के रूट के निर्माण के लिए फ्लेमिंगो की सैंक्चुरी का संरक्षण करना होगा। इसके लिए भारी बोरिंग मशीनों की जरूरत पड़ेगी और यह रूट ही पूरा होने में पांच साल का समय लेगा। 

दूसरी तरफ जापान का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए माल सप्लाई करने का काम केवल दो कंपनियां कावासाकी और हिताची ही कर सकती हैं। हालांकि, बाद में पता चला कि ये दोनों कंपनियां एक साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकती हैं। इस तरह से सिंगल टेंडर की स्थिति पैदा हो गई। फिलहाल यह मामला उच्च अधिकारी देख रहे हैं। 

दूसरी तरफ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे संबंध थे। आबे के पद पर ना होने से प्रोजेक्ट तेजी से पूरा नहीं हो पाएगा। 

दूसरी तरफ जमीन अधिग्रहण का मामला भी लटका हुआ है। महाराष्ट्र में अब तक 430 हेक्टेयर में केवल 100 हेक्टेयर जमीन का ही अधिग्रहण ही हो पाया है। गुजरात में भी एक हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। बताया जा रहा है कि यह काम इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। 

वहीं बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में होने वाली देरी को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस प्रोजेक्ट को खर्च का स्मारक बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, "508 किलोमीटर की लागत 1,10,000 करोड़। प्रति किलोमीटर की लागत 217 करोड़। लागत में 90 प्रतिशत की वृद्धि और देरी। यह है मोदी जी की बुलेट ट्रेन। -24 प्रतिशत जीडीपी, डूबती अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी में ये एक आदमी की जिद के 'व्यर्थ खर्च का स्मारक' नहीं तो फिर क्या है?"