कोवैक्सीन के मुकाबले कोविशिल्ड बनाता है ज्यादा एंटीबॉडी, नई स्टडी में हुआ खुलासा

COVAT के शुरुआती शोध में ये बात सामने आई है कि कोवैक्सीन की तुलना में कोविशिल्ड अधिक मात्रा में एंटीबॉडीज बनाती है, देशभर के स्वास्थ्यकर्मियों पर किया गया है अध्ययन

Updated: Jun 07, 2021, 01:18 PM IST

कोवैक्सीन के मुकाबले कोविशिल्ड बनाता है ज्यादा एंटीबॉडी, नई स्टडी में हुआ खुलासा
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नई दिल्ली। भारत में मुख्यरूप से कोरोना दो टीके कोवैक्सीन और कोविशिल्ड लगाए जा जा रहे हैं। वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि कौन सा टीका ज्यादा असरदार और कारगर है। अब इस बात की जानकारी मिल गई है कि कौन सा टीका ज्यादा एंटीबॉडीज बनाता है। एक स्टडी के मुताबिक कोवैक्सीन के मुकाबले कोविशिल्ड ज्यादा एंटीबॉडी बनाता है।

कोरोना वायरस वैक्सीन इंड्युस्ड एंटीबॉडी टाइट्रे (COVAT) ने लोगों पर टीकों का असर जानने के लिए टीका ले चुके हेल्थ वर्कर्स पर स्टडी किया था। इस स्टडी में वैक्सीन ले चुके भारत के 13 राज्यों के 22 शहरों के 515 स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया गया था। इनमें 425 हेल्थ वर्कर्स ऐसे थे जिन्होंने कोविशील्ड का डोज लिया था वहीं 90 को कोवाक्सिन की डोज लगी थी।

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इस अध्ययन में पाया गया कि कोरोना की दोनों वैक्सीन का प्रभाव अच्छा है। रिसर्चर्स के मुताबिक इन दोनों टीकों का दूसरा डोज लेने के 21 से 36 दिनों बाद स्वास्थ्यकर्मियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता 95 प्रतिशत तक बढ़ गई। इनमें कोविशील्ड लेने वालों की सीरोपॉजिटिविटी 98 फीसदी तक बढ़ गई। वहीं जिन्होंने कोवैक्सीन का डोज लिया था उनमें यह दर महज 80 फीसदी थी।

इतना ही नहीं कोविशील्ड लेने वालों में एंटी-स्पाइक एंटीबॉडी टाइट्रे कोवैक्सीन की तुलना में ज्यादा पाई गई। कोविशील्ड लगे व्यक्तियों में एंटी-स्पाइक टाइट्रे की मात्रा (115 AU/ml) थी वहीं कोवैक्सीन लेने वालों में यह मात्रा (51 AU/ml) थी। सीरोपॉजिटिविटी रेट 60 साल से कम उम्र के लोगों में 96.3 फीसदी जबकि 60 साल से ज्यादा के व्यक्तियों में 87.2 फीसदी पाई गई। टीका लगने के बाद 5 पांच लोगों में दोबारा कोरोना संक्रमण देखा गया, हालांकि टीके का असर ये रहा कि लोग गंभीर रूप से बीमार नहीं हुए।

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इसी बीच यह खबर भी सामने आई है कि कोविशिल्ड को भविष्य में सिंगल शॉट वैक्सीन बनाने पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस विषय में शोध की जा रही है कि क्या कोविशिल्ड का एक ही डोज लोगों के लिए काफी है? यदि शोध में यह बात सामने आता है कि कोविशिल्ड के एक डोज से भी पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता डेवेलप हो रही है, तब सरकार इसकी एक डोज ही देने पर विचार कर सकती है। ऐसा होने पर टीकाकरण अभियान में भी तेजी आने की उम्मीद है।