पेट्रोल पर घटेगी निर्भरता, देश में अब E85 और E100 एथेनॉल फ्यूल से चल सकेंगी गाड़ियां
केंद्र सरकार ने महंगे पेट्रोल से निजात दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। परिवहन मंत्रालय ने E85 और E100 एथेनॉल ईंधन को शामिल करने का ड्राफ्ट जारी किया है।
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल की बढ़ती खपत, महंगे कच्चे तेल के आयात और विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन को लेकर एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। नए ड्राफ्ट में पेट्रोल में अधिक मात्रा में एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन E85 और E100 को औपचारिक रूप से शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो भविष्य में ऐसी गाड़ियां सड़कों पर दिख सकती हैं जो लगभग पूरी तरह एथेनॉल आधारित ईंधन पर चल सकेंगी।
मंत्रालय ने 27 अप्रैल को जारी इस मसौदे में फ्यूल क्लासिफिकेशन, उत्सर्जन मानकों और हाई एथेनॉल ब्लेंड वाले वाहनों के लिए तकनीकी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत मौजूदा पेट्रोल श्रेणी E10/E को बदलकर E10/E20 करने की योजना है। साथ ही E25, E27, E85 और E100 जैसे नए फ्यूल विकल्पों को भी नियमों में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। बायोडीजल की श्रेणी को भी B10 से बढ़ाकर B100 तक ले जाने का प्रस्ताव दिया गया है।
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E85 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण हो। जबकि, E100 पूरी तरह शुद्ध एथेनॉल आधारित ईंधन होगा। एथेनॉल एक बायोफ्यूल है जिसे गन्ना, मक्का, टूटे चावल और कृषि अपशिष्ट से तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी लागत पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कम हो सकती है और भारत में इसकी कीमत 60 से 70 रुपये प्रति लीटर के आसपास रहने का अनुमान है।
सरकार ने फिलहाल इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया है। आम लोग, ऑटोमोबाइल कंपनियां और उद्योग से जुड़े हितधारक इस पर अपनी राय दे सकते हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी। भारत ने पिछले साल पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 का लक्ष्य हासिल कर लिया था। अब सरकार इससे आगे बढ़ते हुए हाई ब्लेंड फ्यूल के उपयोग की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है।
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सरकार की योजना के अनुसार, E20 देशभर में सामान्य ईंधन के तौर पर उपलब्ध रहेगा। जबकि, E25, E27, E85 और E100 को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उन वाहनों के लिए पेश किया जाएगा जो तकनीकी रूप से इसके अनुकूल होंगे। यानी मौजूदा सभी गाड़ियां तुरंत इन ईंधनों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी और यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में ग्रॉस व्हीकल वेट की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा HCNG यानी हाइड्रोजन कंप्रेस्ड नेचुरल गैस से जुड़े नामों में भी बदलाव की बात कही गई है।
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एथेनॉल ब्लेंडिंग की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा था कि एक दशक पहले पेट्रोल में केवल 1 से 2 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था लेकिन अब यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है। जिसकी वजह से हर साल करीब साढ़े चार करोड़ बैरल पेट्रोल आयात कम हुआ है। वहीं, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि भविष्य पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों का नहीं है। उन्होंने वाहन निर्माताओं से बायोफ्यूल और वैकल्पिक ईंधन आधारित तकनीकों को तेजी से अपनाने की अपील की थी।
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