Elgar Parishad: प्रोफेसर हनी बाबू NIA हिरासत में

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू पर नक्सली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप, उनकी गिरफ्तारी का हो रहा है विरोध

Updated: Jul-30, 2020, 01:46 AM IST

Elgar Parishad: प्रोफेसर हनी बाबू NIA हिरासत में
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मुंबई।भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद मामले के सिलसिले में गिरफ्तार दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू को एक विशेष अदालत ने मुंबई में चार अगस्त तक एनआईए हिरासत में भेज दिया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 28 जुलाई को 54 वर्षीय हनी बाबू मुसालियरवीट्टिल थारियाल को इस मामले में गिरफ्तार किया था। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

उन्हें एक विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश किया गया। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपी की कथित संलिप्तता के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया है। एनआईए ने अदालत में कहा कि आरोपी के प्रतिबंधित भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से संबंध हैं।

एजेंसी ने आगे कहा कि जांच के दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक सामानों से विभिन्न पत्र बरामद हुए हैं जो इस मामले में उनकी संलिप्तता के संकेत देते हैं। आरोपी की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि एनआईए द्वारा हनी बाबू से बीते चार-पांच दिनों से पूछताछ की जा रही थी और इसलिए उन्हें आगे हिरासत में भेजे जाने की जरूरत नहीं है। विशेष अदालत के न्यायाधीश एटी वानखेड़े ने उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों को देखने के बाद पाया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने आरोपी को सात दिन की एनआईए हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

यह मामला 31 दिसंबर 2017 में पुणे के शनिवारवाडा में कबीर कला मंच द्वारा आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है। आरोप है कि इसकी वजह से जातीय वैमनस्य बढ़ा और हिंसा हुई, जिसके बाद पूरे महाराष्ट्र में हुए प्रदर्शन में जानमाल की क्षति हुई। पुणे पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र क्रमश: 15 नवंबर 2018 और 21 फरवरी 2019 को दाखिल किया था। एनआईए ने इस साल 24 जनवरी को जांच अपने हाथ में ली और 14 अप्रैल को आनंद तेलतुम्बडे और गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया।

एनआईए ने कहा कि आगे की जांच में खुलासा हुआ कि हनी बाबू नक्सली गतिविधियों और माओवादी विचारधारा का प्रसार कर रहे हैं और गिरफ्तार अन्य आरोपियों के साथ ‘सह-साजिशकर्ता’ हैं।

दूसरी तरफ अकादमिक जगत से लेकर सिविल सोसाइटी और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता प्रोफेसर हनी बाबू की रिहाई की मांग कर रहे हैं।