कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, चल रही थी महाभियोग की कार्यवाही
14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित घर में लगी आग में 500-500 के नोटों के बंडल जले मिले थे। इस विवाद के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।
नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया भी चल रही है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उनके इस्तीफे के साथ ही अब यह प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी।
अपने इस्तीफे में जस्टिस वर्मा ने लिखा कि वे राष्ट्रपति जैसे गरिमामयी पद पर अपने निर्णय के कारणों का अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि इस महत्वपूर्ण पद पर सेवा देना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात रही है। जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने इस्तीफा पत्र में लिखा, "बड़े दुख के साथ, मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद से तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे रहा हूं।"
यह इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब लोकसभा की एक समिति उनके खिलाफ पद से हटाने के प्रस्ताव को लेकर जांच कर रही थी। पिछले वर्ष लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। यह जांच उनके सरकारी आवास से कथित रूप से बिना हिसाब-किताब वाली नकदी मिलने के मामले को लेकर की जा रही थी।
दरअसल, यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित घर में आग लगने के दौरान काफी संख्या में जले हुए नोट बरामद हुए थे। उनके दिल्ली स्थित घर में लगी आग में 500-500 के नोटों के बंडल जले मिले थे। इस विवाद के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी। हालांकि, उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। जब तक उनके खिलाफ चल रही जांच पूरी नहीं हो जाती, उन्हें न्यायिक कामों से दूर रखा गया था।




