रातों रात करोड़पति बना पालघर का मछुआरा, जाल में फंसी 157 सोने के दिल वाली मछलियां

पालघर के मछुआरे की बदली किस्मत, मछली पकड़ने के दौरान बीच समंदर में लगी लॉटरी, 1 करोड़ 33 लाख में बिकी 157 घोल माछलियां

Updated: Sep 02, 2021, 10:20 AM IST

रातों रात करोड़पति बना पालघर का मछुआरा, जाल में फंसी 157 सोने के दिल वाली मछलियां

पालघर। हिंदी में एक मशहूर कहावत है कि ऊपर वाला जब देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है। यह कहावत महाराष्ट्र के पालघर एक मछुआरे पर फिट बैठती है। मछली पकड़ने के दौरान बीच समंदर में इस मछुआरे को ऐसी लॉटरी लगी कि वह रातों रात करोड़पति बन गया। दरअसल, मछुआरे के जाल में डेढ़ सौ से ज्यादा सोने के दिल वाली मछलियां फंस गई थी, जिन्हें बेचकर वह करोड़पति बन गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मॉनसून के दौरान समुद्र में मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी हटने के बाद मुंबई से सटे पालघर के मछुआरे चंद्रकांत तरे 28 अगस्त की रात मछली पकड़ने गए थे। चंद्रकांत के साथ बोट पर उनके बेटे समेत 6 अन्य लोग भी मौजूद थे। चंद्रकांत के मुताबिक वे हारबा देवी नामक नाव पर सवार थे। उन्होंने बताया कि वे पालघर तट से करीब 20 से 25 नॉटिकल माइल भीतर वाधवान की ओर गए थे।

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चंद्रकांत ने बताया कि जैसे ही उन्होंने समुद्र में जाल फेंकी तो वे यह देखकर आश्चर्यचकित हो गए की उनके जाल में दुर्लभ घोल माछलियां फंसी हुई है। पलभर के लिए तो उन्हें भरोसा भी नहीं हुआ लेकिन उन्होंने जाल को नाव पर लाकर देखा तो सही में ये दुर्लभ माछलियां हीं थीं। वो भी एक दो नहीं बल्कि पूरे 157 घोल माछलियां। इन मछलियों की कीमत सोने जवाहरात जितने होने कारण इन्हें 'सी गोल्ड' अथवा 'सोने के दिल' वाली माछलियां भी कहते हैं। 

नाव पर बहुतायत घोल माछलियां पाकर चंद्रकांत को आभास हो गया था कि यह उनके जीवन की सबसे अधिक कमाई वाली ट्रिप साबित होने वाली है। उनके साथ आए लोगों ने खुशी के मारे बीच समुद्र में ही मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया था। किनारे पर आने के बाद जब इन माचलियों का ऑक्शन हुआ तब चंद्रकांत के भाग्य के पिटारे खुल गए। उत्तरप्रदेश और बिहार के व्यापारियों ने 1 करोड़ 33 लाख रुपए में इन मछलियों को खरीदा। चंद्रकांत के मुताबिक हर मछली की कीमत उन्हें करीब 85 हजार रुपए मिली।

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घोल मछलियों में चमत्कारी औषधीय गुण होने के कारण ये बहुत महंगे होते हैं। इनका इस्तेमाल दवाई बनाने और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स बनाने में किया जाता है। सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले धागे, जो अपने आप गल जाते हैं, वे भी घोल मछली से बनाए जाते हैं। इसीलिए विश्वभर में इनकी काफी मांग है। समुद्र में प्रदूषण बढ़ने के कारण ये मछलियां जल्दी नहीं मिलती हैं। समुद्र के बेहद अंदर ही कभी कभी ये मिल पाती हैं। माना जा रहा है कि ये मछलियां झुंड में जा रही थीं, इसलिए वे एक साथ जाल में फंस गयीं।