पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरी चाहिए तो बांग्ला भाषा सीखकर आइए: ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि सरकारी नौकरी में स्थानीय लोगों और बांग्ला भाषा जानने वालों को दी जाएगी प्रथमिकता, ताकि कर्मचारी जनता की समस्याएं समझकर निकाल सकें उनका हल

Updated: Dec 09, 2021, 04:46 PM IST

पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरी चाहिए तो बांग्ला भाषा सीखकर आइए: ममता बनर्जी
Photo Courtesy: navbharat times

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों में बांग्ला भाषा अनिवार्य कर दी है। उनका कहना है कि प्रदेश में सरकारी नौकरी केवल उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिन्हें  बांग्ला भाषा आती है। इस फरमान के बाद अब पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरी के लिए वहीं लोग पात्र होंगे जिन्हें बांग्ला पढ़ना और बोलना आता है। सरकारी नौकरियों में बांग्ला भाषा को प्राथमिकता देने के इस फैसले से उन लोगों की दिक्कतें बढ़ने की आशंका है जिन्हें बांग्ला भाषा नहीं आती है। दरअसल राज्य सरकार स्थानीय लोगों को सरकानी नौकरियों में प्राथमिकता देने के लिए इस तरह के कड़े फैसले ले रही है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि देश के सभी राज्यों को स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देना चाहिए। जिससे प्रदेश का प्रशासनिक कार्यों सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। उन्होंने कहा है कि अगर कोई शख्स बांग्ला भाषी है तो उसे सरकारी नौकरी में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भले ही उसकी मातृभाषा बांग्ला न हो, लेकिन उसे इस भाषा की जानकारी होनी चाहिए। उनका मानना है कि अगर व्यक्ति दूसरी भाषाएं भी जानता है तो यह और अच्छी बात है। 

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ममता बनर्जी ने कहा कि स्थानीय लोग स्थानीय समस्याएं, सरकार के कार्यों को बेहतर तरीके से समझते हैं। स्थानीय भाषा की जानकारी होने से उन्हें लोगों के साथ संवाद में परेशानी नहीं होती। वे कर्मचारी जनता की समस्याओं का निराकरण आसानी से कर सकते हैं। वहीं अगर कर्मचारी को बांग्ला भाषा नहीं आती है तो लोग न तो स्थानीय लोगों से संवाद कर पाते हैं और न ही समस्याओं का निराकरण ही समय पर खोज पाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि SDO और BDO तक के बांग्ला में लिखे सरकारी चिट्ठियों को पढ़ने और उनका जवाब नहीं दे पाते हैं। इसलिए कर्मचारियों को स्थानीय भाषा जानना आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन के कारण अन्य राज्यों के उम्मीदवारों को चुन लिया जाता है।लेकिन बांग्ला भाषा नहीं आने की वजह से वे स्थानीय लोगों के साथ संवाद नहीं कर पाते। जिससे लोगों की समस्याओं का निदान करने में नाकाम रहते हैं।