8 महीने से लापता बेटे की तलाश में क़ब्रें खोद-खोदकर ढूँढ रहा है कश्मीर का एक बाप, न लाश मिली न आस

पिछले साल 2 अगस्त को टेरिटोरियल आर्मी के सिपाही राइफलमैन शाकिर मंजूर ईद पर मां-बाप के साथ लंच करके घर से निकले थे, इसके बाद नहीं मिली कोई सुराग, आतंकियों द्वारा हत्या की आशंका

Updated: Apr 01, 2021, 03:28 PM IST

8 महीने से लापता बेटे की तलाश में क़ब्रें खोद-खोदकर ढूँढ रहा है कश्मीर का एक बाप, न लाश मिली न आस
Photo Courtesy : The Indian Express

श्रीनगर। कहते हैं दुनिया का सबसे बड़ा दुख होता है एक पिता के कंधे पर बेटे की शवयात्रा। लेकिन जम्मू कश्मीर में एक अभागे पिता को यह भी नसीब ना हो सका। मंजूर अहमद वागय, एक ऐसे शख्स हैं, जो ईद पर बिछड़े ्पने बेटे को आज भी ढूंढ़ रहे हैं। हालत ये है कि वो जगह जगह अपने बेटे को कब्रों में खुदाई कर करके ढ़ूंढ़ रहे हैं। बेटे का कोई सुराग नहीं मिल रहा है। मंजूर अहमद वागय का बेटा जम्मू कश्मीर में टेरिटोरियल आर्मी का जवान था और पिछले आठ महीने से वह लापता है।

इस आठ महीने से कोई दिन ऐसा नहीं गया जब वागय ने जमीन में दरार कर अपने बेटे की खोज नहीं की। प्रतिदिन जमीन की खुदाई कर मंजूर अहमद वागय अपने बेटे को जाने के बाद भी देखने की ज़िद पर अड़े हैं। मगर जवान बेटे की लाश लाश तक लापता है। वागय को उम्मीद है कि एक दिन वे अपने 25 वर्षीय बेटे को कहीं ना कहीं ढूंढ निकालेंगे। 

बेटे को याद करते हुए वागय रोने लगते हैं। भरे गले से वागय ने बताया कि पिछले साल 2 अगस्त को मेरा बेटा टेरिटोरियल आर्मी का राइफलमैन शाकिर मंजूर शोपियां इलाके में बालपोरा से बाहिबग सेना कैंप के बीच यात्रा कर रहा था। उस दिन ईद थी, इसलिए वह हमारे साथ लंच करने के लिए घर आ गया था। उसी दिन शाम 5 बजे हमने उसे आखिरी बार देखा था जब वह घर से कैंप के लिए निकला था। 

वागय बताते हैं कि शाकिर ने आखिरी बार उसी दिन घर से निकलने के आधे घंटे के भीतर कॉल किया था। शाकिर ने घरवालों को बताया था कि वे अपने कुछ दोस्तों के पास जा रहे हैं, अगर कोई आर्मी का ऑफिसर उनके बारे में पूछे तो आपलोग चिंता मत कीजिएगा। वागय का कहना है कि तबतक शाकिर का अपहरण कर लिया गया था और आतंकियों ने उन्हें आखिरी फोन मिलाने बस की इजाजत दी थी।

अगले दिन यानी 3 अगस्त को शाकिर का वाहन उनके गांव से लगभग 16 किलोमीटर दूर कुलगाम जिले के एक खेत से बरामद किया गया। करीब 7 दिन बाद शाकिर के कपड़े गांव से तीन किलोमीटर दूर खाई में मिले। वागय की आंखें इस घटना को याद कर भर जाती हैं। वे बताते हैं कि शाकिर की भूरी कमीज और पैंट खून से लथपथ थे। जले हुए शाकिर के वाहन में भी उनके शर्ट का एक टुकड़ा मिला था।  

बुधवार को वागय एक बार फिर उस जगह पर गए थे जहां उनके बेटे के कपड़े मिले थे। वह वहां इसलिए गए थे क्योंकि उनकी भतीजी ने उन्हें कुछ कहा था। वागय बताते हैं कि, 'बुधवार तड़के सुबह मेरी भतीजी उफैरा ने मुझे बताया कि उसने सपने में शाकिर भाई को देखा था। शाकिर ने सपने में उसे कहा कि मेरे शरीर को उसी जगज पर दफनाया गया है जहां मेरे कपड़े मिले थे। इसके बाद मैं फावड़ा लेकर निकल गया, मेरे साथ गांव के 30 लोगो भी मेरे पीछे आ गए वहां हमने खुदाई शुरू कर दी। आसपास की पूरी जमीन खोदने के बावजूद इस बार भी हम खाली घर लौट आए।'

वागय पिछले आठ महीने से सो नहीं पाए हैं। वह कहते हैं कि मैं तबतक कैसे चैन से सो सकता हूं जबतक अपने बेटे का शरीर वापस लाकर उसे ठीक से दफन न कर दूं। वागय का दावा है कि उन्हें पता है कि किसने उनके बेटे का अपहरण किया था। उन्होंने बताया कि चार आतंकी थे जो मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। वागय कई आतंकी संगठनों से संपर्क करने की कोशिश भी कर चुके हैं ताकि कोई उन्हें कहीं से यह पता चल जाए कि उनके बेटे को कहां दफन किया गया था। 

शाकिर के अपहरण के एक हफ्ते बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो टेप वायरल हुआ था। उसमें कहा गया था कि ठीक वैसे ही जैसे मुठभेड़ में मारे गए मिलिटेंट्स का शव अधिकारियों द्वारा उनके परिजनों को नहीं दिया जाता है, उसी प्रकार अब सैनिकों की हत्या के बाद उसके परिवार को उसका शव नहीं दिया जाएगा। मार्च 2020 से एनकाउंटर में मारे गए मिलिटेंट्स के शवों को उनके परिजनों को नहीं सौंपा गया है। सुरक्षाबलों की कार्रवाई के दौरान मारे गए आम लोगों के शव भी कोविड-19 की वजह से उनके परिवारों को नहीं दिए गये और उन्हें उनके घरों से कई किलोमीटर दूर दफन कर दिया गया।

पुलिस रिकॉर्ड में शाकिर को लापता करार दिया गया है और उन्हें अबतक मृत घोषित नहीं किया गया है। हालांकि, वागय को यकीन हैं कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। वागय कहते हैं कि एक महिला ने देखा था कि चार लोग उनके बेटे को तड़पा-तड़पा कर मार रहे थे। इस असीम दुख में भी वागय को आशा है कि वह अपने लाडले के शव को ढूंढ निकालेंगे और इसी आशा के साथ वह हर रोज हाथों में फावड़ा लेकर निकल पड़ते हैं खाई को खोदने। 

मामले पर जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि, 'हमारे पास कोई ठोस जानकारी नहीं है कि शाकिर की हत्या के बाद उसे कहां दफनाया गया था। स्थानीय स्तर पर पुलिस पूरी कोशिश कर रही है। जब भी हमें कोई जानकारी मिलेगी तो इसे परिवार के साथ साझा किया जाएगा।'

वागय को इस बात की नाराजगी है कि ड्यूटी के दौरान मौत के बावजूद उनके बेटे को अबतक शहीद का दर्जा नहीं मिला। वागय कहते हैं कि मेरा बेटा एक सच्चा सिपाही था। उसने भारत के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी। वह अधिकारीयों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहते हैं कि, 'पहले वे शाकिर की जान बचाने में विफल रहे, उसके बाद उसका शरीर भी नहीं ढूंढ पाए। मेरे बेटे को अपहरण के बाद बुरी तरह से यातनाएं दी गई। उसने सबकुछ सहा लेकिन देश के खिलाफ बोलने से इनकार कर दिया।'

वागय ने सरकार से अपील किया है कि उनके बेटे को शहीद घोषित किया जाए। जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन दशक में करीब 8 हजार लोग इस तरह से लापता हुए हैं। सभी लापता लोगों के परिजन सुरक्षाबलों पर उन्हें उठाने का आरोप लगाते रहे हैं। यह पहला मामला है जब कोई सैनिक इस तरह से लापता हुआ हो।