प्रियंका गांधी: नदियों को बड़े पूँजीपतियों के चंगुल से निकालना ज़रूरी, निषाद समुदाय को मिले उनका हक़

प्रयागराज में 1 फरवरी को पुलिस ने कई नाविकों की नावें तोड़ दी थीं, उस वक़्त भी प्रियंका गांधी ने उनका मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया था

Updated: Mar 20, 2021, 05:39 PM IST

प्रियंका गांधी: नदियों को बड़े पूँजीपतियों के चंगुल से निकालना ज़रूरी, निषाद समुदाय को मिले उनका हक़
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लखनऊ। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी नदियों को बड़े पूँजीपतियों-ठेकेदारों के चंगुल से निकालकर निषादों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए काम करती रहेगी। प्रियंका ने यह बात कांग्रेस की तरफ से चल रही नदी अधिकार यात्रा का समर्थन करते हुए कही है। प्रियंका ने एक बार फिर से निषाद समाज के समर्थन में अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए कहा कि नदी के संसाधनों पर उनका हमेशा से हक रहा है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज के हर गांव से अपना हक पाने के लिए आवाज़ उठ रही है।  

प्रियंका गांधी ने कहा है कि यूपी कांग्रेस, पिछड़ा वर्ग विभाग की नदी अधिकार यात्रा 19 दिन से 418 किमी चलकर निषाद समाज के बीच जाकर उनके हक की आवाज उठा रही है। निषाद नदियों के राजा और रक्षक हैं। कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, 'निषाद समाज के गांव-गांव से एक ही आवाज उठ रही है कि उनकी सुख-दुख की साथी नदियों के संसाधनों बालू, मछली, नदी किनारे की जमीन इत्यादि के इस्तेमाल को बड़े पूजीपतियों-ठेकेदारों के चंगुल से निकालकर निषादों को इनके उपयोग का हक मिलना चाहिए।

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कांग्रेस नेता ने कहा कि यह निषादों की आजीविका का सवाल है। और हम (कांग्रेस) उनकी लड़ाई प्रतिबद्धता से लड़ेंगे। प्रियंका गांधी ने निषाद यात्रा की अगुवाई कर रहे कांग्रेस नेता देवेंद्र निषाद, कुंवर निषाद (विधायक), वंदना निषाद के साथ साथ इस यात्रा में सहभागी सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया है। 

 

 

दरअसल प्रयागराज में निषाद समाज और स्थानीय पुलिस के बीच 1 फरवरी को झड़प हो गई थी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने कई नाविकों की नावें तोड़ दी थीं। इस घटना के बाद प्रियंका गांधी प्रयागराज के बँसवार गांव पहुंची थी। जहां उन्होंने पीड़ित निषाद परिवार से मुलाक़ात करके उनकी लड़ाई लड़ने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने निषादों की लड़ाई लड़ने के लिए नदी/निषाद यात्रा निकालने की ठानी। निषाद समुदाय में आम तौर पर समाजवादी पार्टी या बीजेपी की पैठ रही है। लेकिन इस बार बीजेपी की सरकार उनके खिलाफ खड़ी दिख रही है, जबकि कांग्रेस उनके हक की लड़ाई लड़ रही है। यह लड़ाई उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को फिर से नई ऊर्जा देने के लिहाज से काफी अहम साबित हो सकती है।