राफेल डील में दलाली: भ्रष्टाचार की जांच के लिए जज नियुक्त, राहुल बोले- चोर के दाढ़ी का तिनका

भारत द्वारा खरीदे गए राफेल लड़ाकू विमानों की विवादास्पद मल्टी-अरब डॉलर डील में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच ने नियुक्त किया जज

Updated: Jul 03, 2021, 07:16 PM IST

राफेल डील में दलाली: भ्रष्टाचार की जांच के लिए जज नियुक्त, राहुल बोले- चोर के दाढ़ी का तिनका

नई दिल्ली। राफेल डील मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र की मोदी सरकार को क्लीन चीट देने के बाद अब फ्रांस सरकार ने इसके जांच के आदेश दे दिए हैं। इस मल्टी-अरब डॉलर डील को लेकर फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच ने एक जज की नियुक्ति की है जो मामले की भ्रष्टाचार के एंगल से जांच करेंगे। फ्रांस के इस फैसले के बाद भारत सरकार की भूमिका एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है।

भारत को बेचे गए 36 जेट सौदे की जांच के लिए न्यायाधीश की नियुक्ति के बाद कांग्रेस केंद्र की मोदी सरकार के प्रति आक्रामक हो गई है। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा सच्चाई सामने आ रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले में सीधे तौर पर पीएम मोदी को घसीटते हुए राफेल को चोर की दाढ़ी का तिनका यानी प्रधानमंत्री मोदी की दाढ़ी का तिनका करार दिया है। राहुल ने ट्वीट किया, 'चोर की दाढ़ी… #RafaleScam' 

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बयान जारी कर कहा है कि, 'जो ताज़ा खुलासे अब फ्रांस में हुए हैं, उन्होंने एक बार फिर शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी; प्रथम दृष्टि से राफेल एयर क्राफ्ट सौदे में भष्टाचार साबित है, सामने है; जो कांग्रेस और राहुल गाँधी कहते रहे हैं वो आज साबित हो गया है। दसाल्ट, जो 49% हिस्सेदार है, वो एक 169 मिलियन यूरो में से 159 मिलियन यूरो लाने के लिए बाध्य होगी और 51% की मालिक रिलायंस केवल 10 मिलियन यूरो लाएगी।' 

दरअसल, फ्रांस के एक मीडिया संस्थान मीडियापार्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि राफेल फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी दसॉ ने डील के लिए भारत में एक दलाल को 1 मिलियन यूरो दिया था। मीडियापार्ट ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि जब फ्रांस की एंटी करप्शन एजेंसी ने इस समझौते का ऑडिट किया तब दसॉ ने अपने स्पष्टीकरण में कहा था कि उसने Defsys Solutions नामक कंपनी को विमान के 50 नमूने बनाने के लिए भुगतान किया था।

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हालांकि इन विमानों के मॉडल कभी बनाए ही नहीं गए थे। इतना ही नहीं इस कथित घोटाले की रिपोर्ट लिखने वाले रिपोर्टर का दावा है कि यह तो अभी खुलासों की केवल एक परत है, अभी इस मामले में दो और बड़े खुलासे होने बाकी हैं।

भारत सरकार और फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी दसॉ के बीच 36 विमानों के लिए 7.8 बिलियन यूरो (9.3 बिलियन डॉलर) का सौदा लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप और विवादों में फंसा हुआ है। भारत में पिछले लोकसभा चुनावों से ठीक पहले 2019 के शुरुआती महीनों में राफेल विमानों के समझौते और उसके पैरलेल नेगोशियेशन का मुद्दा भी काफी गर्माया था। कांग्रेस और राहुल गांधी लगातार राफेल की खरीद और उसके समझौते में बड़े घोटाले का आरोप प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी पर लगाते रहे हैं।