DRDO की एंटी कोरोना मेडिसिन 2 DG जारी, रक्षा मंत्री ने बताया उम्मीद की किरण

आज एक कार्यक्रम के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कोरोना रोधी दवा 2 DG स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को सौंपा, इसके बाद हर्षवर्धन ने एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया को सौंपा

Updated: May 17, 2021, 02:43 PM IST

DRDO की एंटी कोरोना मेडिसिन 2 DG जारी, रक्षा मंत्री ने बताया उम्मीद की किरण
Photo Courtesy: Twitter

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के खिलाफ जारी जंग को जीतने के लिए भारत को 2 DG के रूप में नया हथियार मिल गया है। DRDO द्वारा विकसित इस कोरोनारोधी दवा के पहले बैच का आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। सिंह ने इस दवा को देश के लिए उम्मीद की नई किरण बताया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों की रिसर्च और कड़ी मेहनत के बाद भारत ने इस दवा को तैयार किया है।

दिल्ली के डीआरडीओ भवन में आज हुए एक कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दवा का पहला बैच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को सुपुर्द किया। इसके बाद हर्षवर्धन ने इस दवा को एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया को सौंपा। राजनाथ सिंह ने इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लिए यह दवा उम्मीद की एक नई किरण है। उन्होंने कहा, 'इस दवा को विकसित करने में जिन वैज्ञानिकों की मुख्य भूमिका है, मैं उन्हें अपने हाथों से सम्मानित करना चाहूंगा। 2 DG आशा और उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है, यह दवा हमारे देश के वैज्ञानिकों के काबिलियत की एक मिसाल है।'  

इस दौरान केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि, 'इस महीने में आज का दिन देशवासियों लिए सबसे ज्‍यादा सुखद दिन है। पिछले एक साल से ज़्यादा समय से हम कोविड के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। डीआरडीओ के सहयोग और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की लीडरशिप में इस वैक्सीन को तैयार किया गया है। कोविड वायरस के प्रकोप से निपटने में वैज्ञानिक नजरिये से यह दवा पूरी तरह सक्षम है। भारत की यह पहली पूर्ण स्वदेशी दवा है।'

यह भी पढ़ें: भारत के टॉप वायरोलॉजिस्ट डाक्टर शाहिद जमील ने कोविड पैनल से दिया इस्तीफा, सरकार से था मतभेद

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दवा एक पाउडर की तरह सैशे में आती है जिसे आसानी से पानी में घोलकर मरीजों को दिया जा सकता है। इस दवा का पूरा नाम 2-DG यानी डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (Deoxy D Glucose) है। यह दवा सिर्फ डॉक्टरों के प्रेस्क्रिप्शन और इलाज के प्रोटोकॉल का तहत मरीजों को दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इसके इस्तेमाल से न केवल मरीज जल्द ठीक होंगे, बल्कि ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता भी कम होगी।

कैसे काम करती है यह दवा

DRDO के डॉक्टर एके मिश्रा ने इस दवा के कार्यप्रणाली के बारे में मीडिया को बताया है कि, 'किसी भी वायरस के ग्रोथ में ग्लूकोज का होना जरूरी होता है। ग्लूकोज के अभाव में वायरस के मरने के चान्सेस बढ़ जाते है। हमने दवा में ग्लूकोज का एक एनालॉग मिलाया है। कोरोना वायरस इसे ग्लूकोज समझकर खाएगा, लेकिन यह ग्लूकोज नहीं है, और ऐसे में वायरस की मौत हो जाएगी। यही इस दवा का बेसिक प्रिंसिपल है।

यह भी पढ़ें: गौ मूत्र पीने से दूर होता है फेफड़ों का इंफेक्शन, मैं लेती हूं इसलिए मुझे नहीं हुआ कोरोना- साध्वी प्रज्ञा

गौरतलब है कि भारत में अबतक कोरोना के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए रेमेडेसीवीर इंजेक्शन और फैबिफ्लू जैसी दवाएं दी जा रही है। वहीं टीका के तौर पर कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के बाद रूसी वैक्सीन स्पूतनिक V को भी मंजूरी दी गई है। 2- DG के आने के बाद मरीजों के इलाज में और मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल एक सप्ताह में इस दवा के 10 हजार डोज बनाए जा रहे हैं। जून के पहले हफ्ते तक देशभर में सभी जगहों पर इस दवा की उपलब्ध सुनिश्चित की जाएगी।