भारत के टॉप वायरोलॉजिस्ट डाक्टर शाहिद जमील ने कोविड पैनल से दिया इस्तीफा, सरकार से था मतभेद

भारत में कोरोना महामारी कंट्रोल से बाहर हो गई है का खुलासा करने वाले देश के जानेमाने वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने कोविड पैनल छोड़ दिया है, उन्होंने विश्व स्तर पर भारत में कोरोना महामारी को लेकर की जा रही गलतियां उजागर की थीं

Updated: May 17, 2021, 07:02 PM IST

भारत के टॉप वायरोलॉजिस्ट डाक्टर शाहिद जमील ने कोविड पैनल से दिया इस्तीफा, सरकार से था मतभेद
Photo courtesy: National Herald

देश के टॉप मोस्ट विषाणु विज्ञानी डाक्टर शाहिद जमील ने सार्स-कोविड जीनोम कंसोर्शियम (INSACOG) के वैज्ञानिक सलाहकार मंडल के प्रमुख के पद से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने सरकार से मतभेदों के चलते इस्तीफा दिया है। उन्होंने खुलासा किया था कि आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना अभी तक एक और दुर्घटना है, उन्होंने कहा है कि भारत में कोरोना महामारी कंट्रोल से बाहर हो गई है। हम जिस मानवीय कीमत को झेल रहे हैं, वह एक स्थायी निशान छोड़ जाएगी।

डॉक्टर शाहिद जमील कोविड महामारी पर अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले सप्ताह सरकार के प्रयासों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार के अधिकारियों ने समय से पहले मान लिया था कि महामारी खत्म हो गई है। उन्होंने इसे सबसे बड़ा गलती बताया था। सरकारी अधिकारियों ने समय से पहले यह मानने में गलती की थी कि जनवरी में कोरोना महामारी खत्म हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि कई अस्थायी सुविधाओं को बंद कर दिया गया था, जिसे कोरोना महामीर की वहज से पिछले महीनों में स्थापित किया गया था।

 मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने एक आर्टिकल में लिखा था कि भारत में साइंटिस्ट फैक्ट के आधार पर पॉलिसी बनाने को लेकर अड़ियल रवैये का सामना कर रहे हैं। देश के कोविड मैनेजमेंट की समस्याओं का खुलासा विश्व स्तर पर किया था। जांच की धीमी गति, वैक्सीनेशन और वैक्सीन की कमी के मुद्दे भी प्रमुख थे। उन्होंने लिखा था कि देश में हेल्थकेयर बढ़ाने पर बल दिया था।

उन्होंने सरकार पर तथ्यों के आधार पर पॉलिसी बनाने के अडियल रवैये की बात करते हुए लिखा था कि सभी उपायों को लेकर भारत में उनके साथी साइंटिस्टों का काफी समर्थन मिल रहा है। लेकिन उन्हें तथ्यों के आधार पर पॉलिसी बनाने को लेकर अड़ियल रवैये का सामना करना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 30 अप्रैल को 800 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने अपील की थी कि उन्हें डाटा उपलब्ध करवाया जाए जिससे वे कोविड 19 वायरस की स्टड़ी और उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा अंदाजा लगाने की स्थिति में हों।

न्यूयॉर्क टाइम्स के एक आर्टिकल में उन्होंने कोरोना टेस्टिंग और आइसोलेशन बढ़ाने, हॉस्पिटल्स में बेड समेत कई अस्थायी सुविधाएं बढ़ाने की बात कही थी। वहीं रिटायर्ड डॉक्टर्स और नर्सों की सर्विसेज लेने के लिए लिस्टिंग पर जोर दिया था। वहीं ऑक्सीजन और कोरोना में लगने वाली महत्वपूर्ण दवाओं की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर बल दिया था

डाक्टर शाहिद जमील ने लिखा था, "इन सभी उपायों को अमल में लाने के लिए भारत में मेरे साथी वैज्ञानिकों के बीच व्यापक समर्थन प्राप्त है लेकिन वे साक्ष्य-आधारित नीति निर्माताओं के कड़े प्रतिरोध का सामना कर रहे हैं।”

सार्स-कोविड जीनोम कंसोर्शियम याने INSACOG  जनवरी 2021 अस्तित्व में आया था। यह कोरोना वायरस की स्टडी और इससे निपटने के लिए योजना बनाने में अहम योगदान देता है। SARS-CoV2 वायरस और इसके कई रूपों के जीनोम अनुक्रमण को बढ़ावा देने और तेज करने के लिए एक साइंटफिक बॉडी के रूप में अस्तित्व में आया था। इस कंसोर्टियम ने देश के विभिन्न स्थानों से कोविड वायरस के नमूनों के जीन सीक्वेंसिंग  करने के लिए 10  लैब्स का एक नेटवर्क तैयार किया था। पहले इसका कार्यकाल छह महीने का था, बाद में इसे लगातार बढ़ा दिया गया। जीनोम सीक्वेंसिंग का काम जो बहुत धीमी गति से प्रोग्रेस कर रहा था। INSACOG के स्थापना के बाद ही इस स्टडी ने स्पीड पकड़ी थी।