यूपी के शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई ने दिया असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पद से इस्तीफ़ा, गरीब कोटे से नियुक्ति पर उठे थे सवाल

सतीश द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी का चयन सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ था, अरुण द्विवेदी गरीब कोर्ट से नियुक्त किए गए थे, मंत्री की किरकिरी के बाद भाई ने कहा- भाई की इज़्ज़त से बढ़कर कुछ भी नहीं

Updated: May 26, 2021, 04:51 PM IST

यूपी के शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई ने दिया असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पद से इस्तीफ़ा, गरीब कोटे से नियुक्ति पर उठे थे सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी ने आखिरकार असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से इस्तीफा दे दिया है। अरुण द्विवेदी ने अपने त्याग पत्र में लिखा है कि उनके भाई की छवि को धूमिल करने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाए गए। जिस वजह से वे मानसिक तनाव से गुज़र रहे हैं। लिहाज़ा उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का मन बनाया है। 

शिक्षा मंत्री के भाई ने कहा है कि उनका चयन नियमों के अनुसार हुआ था। उनके पास सभी कागजात मौजूद हैं। उनके चयन में उनके भाई सतीश द्विवेदी की कोई भूमिका नहीं थी। लेकिन उनके लिए अपने भाई के सम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इसलिए वे अपना इस्तीफा दे रहे हैं। 

हालांकि अरुण द्विवेदी के इस इस्तीफे को गुरुवार को सिद्धार्थनगर में होने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए योगी आदित्यनाथ कोरोना से निपटने की समीक्षा करने हेतु राज्य के ज़िलों का दौरा कर रहे हैं। गुरुवार को उन्हें सिद्धार्थनगर आना है। लिहाज़ा योगी के दौरे से ठीक एक दिन पहले अरुण द्विवेदी द्वारा दिए गए इस्तीफे को योगी के इसी दौरे से जोड़ा जा रहा है। 

यह भी पढ़ें : शिक्षा मंत्री का भाई गरीब कोटे से बना असिस्टेंट प्रोफेसर, सोशल मीडिया पर बवाल

अरुण द्विवेदी ने बीते शुक्रवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद संभाला था। अरुण द्विवेदी का चयन आर्थिक तौर पर कमज़ोर वर्ग के कोटे से किया गया था। अरुण द्विवेदी राज्य सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई हैं, इसलिए गरीब कोटे से उनके चयन पर सवाल खड़े किए जाने लगे। हालांकि खुद मंत्री सतीश द्विवेदी और विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेंद्र दुबे ने नियुक्ति में सिफारिश और धांधली के आरोपों का खण्डन किया। 

विश्वविद्यालय के कुलपति ने मीडिया को बताया था कि असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल दो पदों के लिए चयन किया जाना था। एक पद ओबीसी वर्ग तो दूसरा EWS वर्ग से आने वाले आवेदनकर्ता के लिए आरक्षित था। इंटरव्यू में अरुण द्विवेदी दूसरे स्थान पर ज़रूर थे लेकिन एकेडमिक रिकॉर्ड्स और बाकी अंकों के आधार पर वे प्रथम स्थान पर थे। कुलपति ने यह भी दावा किया था कि अरुण द्विवेदी राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई हैं, इस बात की जानकारी तक किसी को नहीं थी।