दफ्तर दरबारी: अफसरों को देख कैलाश विजयवर्गीय को क्यों याद आया जूता

MP IAS: अपने बयानों के कारण पिछले कुछ समय से विवादों से घिरे कैलाश विजयवर्गीय नए विवाद से बच गए। इस बार भी कारण जूता होता लेकिन वक्त रहते उन्होंने बात संभाल ली। बात अफसराें की सभा में हुई इसलिए कैलाश विजयवर्गीय का अफसर के सामने जूता उठाना याद गया।

Updated: Apr 18, 2026, 02:24 PM IST

अफसर और जूते के साथ नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पुराना नाता है। एक बार फिर जब नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अफसरों के बीच थे तो उन्हें जूता याद आ गया। भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में शहरी सुधार कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उन्होंने अपने करीब दो घंटे के भाषण में इंदौर के मेयर रहने के संस्मरण सुनाए और नगरीय सुधार तथा विकास के लिए तमाम टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि अफसरों के हाथ में जूता होना चाहिए। फिर बात संभालते हुए कहा कि यह जूता मारने के लिए नहीं, डराने के लिए हो। अपने पावर का उपयोग शहर के सबसे बदमाश लोगों पर करें। 

ये वही कैलाश विजयवर्गीय हैं जिन्होंने 1994 में इंदौर में गुस्से में आ कर पुलिस अधिकारी प्रमोद फलणीकर के सामने हाथ में जूता ताने लिया था। अपने भाषण में उन्होंने उस घटना का जिक्र तो नहीं किया लेकिन इतना जरूर कहा मैं जब मेयर था तो खड़े रहकर अपने सामने अवैध निर्माण तुड़वा दिए। शहर के नागरिकों को नियम से चलना सिखा दिया। जबकि तब प्रदेश में हमारी सरकार नहीं थी, पुलिस हमारी नहीं थी। सिर्फ अफसर सहयोग करते थे।

अपने बयानों के कारण पिछले कुछ समय से विवादों से घिरे कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर विवाद से बच गए। इस बार भी कारण जूता होता लेकिन वक्त रहते उन्होंने बात संभाल ली। बात तो यह है कि कैलाश विजयवर्गीय को जूता क्यों याद आया? अफसरों के पास शक्ति व उसके उपयोग के लिए वे किसी दूसरी उपमा का प्रयोग भी कर सकते थे।

सीएस के सामने दीपाली रस्तोगी का ज्ञान, ओवर कांफिडेंस तो नहीं

प्रदेश के शीर्ष अफसरों की बातचीत में हुई एक बहस पर प्रशासनिक गलियारे में अब भी चर्चाएं आम हैं। मुख्य सचिव अनुराग जैन मंत्रालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ले रहे थे। सीएम हेल्पलाइन में आ रहीं शिकायतें, लोकसेवा गारंटी और कार्यों की समीक्षा के दौरान वन एवं राजस्व से संबधित भूमि विवादों की बात शुरू हो गई। इस पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने माना कि विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। वे चीफ कंप्लेंट ऑफिसर बन गए हैं। गांव में वन और राजस्व भूमि को लेकर समस्याएं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब सीएस ने शिकायत का मुद्दा उठाया तो एसीएस संजय शुक्ला ने कहा कि गांव में वन और राजस्व की जमीन अब तक स्पष्ट नहीं है। इसी के चलते विवाद बन रहे है। इस पर एसीएस अशोक वर्णवाल ने कहा कि वन विभाग की जमीन पोर्टल पर है। 

बात चल ही रही थी कि पंचायत विभाग की एसीएस दीपाली रस्तोगी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अधिकारियों के स्तर पर जो जानकारी सामने आ रही है, वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए जमीन के रिकॉर्ड तक पहुंचना अभी भी मुश्किल है और गांवों में राजस्व व वन भूमि की स्पष्ट स्थिति नहीं है। कई जगहों पर माप में अंतर भी सामने आता है, जिससे विवाद बढ़ते हैं। दीपाली रस्तोगी के इस कथन से बैठक में सन्नाटा खींच गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के तीन अफसरों के इस कटु संवाद से मीटिंग में तल्खी आ गई।

इस बैठक के बाद एसीएस दीपाली रस्तोगी के स्टैंड पर अफसर दो राय हैं। उनका दखल देना कुछ अफसरों को रास नहीं आया। वे कह रहे हैं कि एसीएस दीपाली रस्तोगी का यह व्यवहा मिस बिहेव की श्रेणी में आता है। जबकि कुछ का मानना है कि दीपाली रस्तोगी ने सच कह कर अफसरों को नजरें चुराने पर मजबूर कर दिया है। 

अपने पूर्व अफसर का नहीं तो बुजुर्ग का सम्मान कर लेती एसपी

पन्ना जिले में वर्दी से वर्दी के संघर्ष का मामला गरमा गया है। पूर्व डीएसपी भरत सिंह चौहान और पत्नी राजश्री चौहान चौहान के साथ पन्ना से ग्वालियर जा रहे थे। रास्ते में मदला थाने के पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रोकी। सीट बेल्ट न पहनने पर बात इतनी बढ़ी कि पुलिस ने बुजुर्ग दंपति को हिरासत में ले लिया। रिटायर्ड डीएसपी पर पुलिस से अभद्रता और बंदूक तानकर धमकी देने के आरोप लगे। आरक्षक बाबू साहू की शिकायत पर शासकीय कार्य में बाधा और जान से मारने की धमकी जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई।

इस मामले में मप्र राज्य पुलिस सेवा पेंशनर्स एसोसिएशन खुलकर रिटायर्ड डीएसपी भरत सिंह चौहान और उनकी पत्नी के समर्थन में आ गया है। एसोसिएशन ने इंदौर, ग्वालियर और भोपाल सहित प्रदेशभर में डीजीपी के नाम ज्ञापन सौंपा। पन्ना पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एसोसिएशन ने कहा है कि अपनी पूरी उम्र विभाग को देने वाले वरिष्ठ अधिकारी और उनकी पत्नी के साथ महज एक छोटे से विवाद में पुलिस ने निर्दयी सलूक किया। 76 वर्षीय पत्नी गिड़गिड़ाती रहीं कि 82 वर्षीय पूर्व डीएसपी बीमार हैं, बुजुर्ग हैं, उम्र के कारण याददाश्त ब कमजोर हो चुकी है। लेकिन वर्दी के अहंकार में चूर पन्ना पुलिस ने उनके साथ किसी आतंकवादी जैसा व्यवहार किया। 

आरोप है कि पन्ना एसपी निवेदिता नायडू के इशारे पर संगीन जुर्म में बदल दिया गया। 82 साल के बुजुर्ग और उनकी पत्नी पर सरकारी कार्य में बाधा डालने की धाराएं लगाई गईं। बंदूक लाइसेंसी थी लेकिन आर्म्स एक्ट (25/27) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। दोनों बुजुर्गों को गिरफ्तार कर कोर्ट ले जाया गया। डिस्ट्रिक्ट जज ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मिनटों में जमानत दे दी। 

इस व्यवहार से आहत पूर्व पुलिस अधिकारियों ने पैदल मार्च निकालकर पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा। इन अधिकारियों का कहना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरी पुलिस परंपरा का अपमान है। बुजुर्ग ने दुर्व्यवहार किया था तो उसे उनकी उम्र देख नजरअंदाज किया जा सकता था। आखिर नेता पुत्रों की दादागिरी पुलिस चुपचाप सह तो लेती है। लेकिन पन्ना में एसपी निवेदिता नायडू ने वर्दी को कलंकित किया है। 

आखिरी स्पीच में भी प्रभाव जमा गए कलेक्टर 

धार कलेक्टर के रूप में बीते साढ़े तीन सालों में अलग पहचान बना चुके आईएएस प्रियंक मिश्रा ने विदाई भाषण में अलग प्रभाव जमा दिया। मीडिया की बात करते हुए उन्होंने बड़े अखबार या चैनल का नाम न लेकर एक स्थानीय यू ट्यूबर द्वारा की जाने वाली आलोचना की प्रशंसा की। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अपने विदाई उद्बोधन में एक कुशल पत्रकार में रूप में रेणु अग्रवाल की कार्यशैली का जिक्र किया एवं भरे मंच से उनकी तारीफ की। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि यू ट्यूबर रेणु अग्रवाल ने रात हो या दिन, बेबाकी से कार्य किया व जहां जरूरत हुई वहां आलोचना से पीछे नहीं हटी।

एक छोटे से स्थानीय यू-ट्यूब चैनल को ज़िले की सबसे भरोसेमंद आवाज के रूप मिली पहचान आंचलिक पत्रकारिता का चेहरा है। दूसरी तरफ, कुछ कलेक्टर जहां स्थानीय मीडिया को हिकारत से देख कर उन्हें कुचलने का काम करते हैं वहीं प्रियंक मिश्रा ने तीसरी वॉयस को रेखांकित कर अलग अफसर की छवि बनाई है।