मैंने धोनी से पूछा था टीम से बाहर रखने का कारण, लेकिन धोनी नहीं दे पाए कोई जवाब: हरभजन सिंह

हरभजन सिंह संन्यास के बाद से ही खुद को और साथी खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप 2011 के बाद दरकिनार किए जाने के मुद्दे पर लगातार बोल रहे हैं, अब उन्होंने खुलासा किया है कि उन्होंने खुद इस सिलसिले में टीम इंडिया के तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से भी जवाब मांगा था

Publish: Dec 31, 2021, 04:53 PM IST

मैंने धोनी से पूछा था टीम से बाहर रखने का कारण, लेकिन धोनी नहीं दे पाए कोई जवाब: हरभजन सिंह
Photo Courtesy: Jantserishta.com

नई दिल्ली। टर्बनेटर हरभजन सिंह क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद लगातार यह कह रहे हैं कि समय से पहले ही उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। हरभजन के बयानों में बिना कारण टीम इंडिया से बाहर किए जाने की टीस साफ तौर पर झलक रही है। भज्जी ने अब इस मुद्दे पर भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह सिंह धोनी का भी ज़िक्र छेड़ दिया है। 

हरभजन सिंह ने एक निजी न्यूज़ चैनल के साथ बातचीत में इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने टीम से बाहर रखे जाने के संबंध में खुद टीम के तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से बात की। भज्जी ने कहा कि उन्होंने धोनी से उन्हें टीम में सेलेक्ट न किए जाने का कारण पूछा था। लेकिन धोनी ने भज्जी को इस मसले पर कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। 

हरभजन ने कहा कि मैंने 31 वर्ष की उम्र में चार सौ विकेट ले लिए थे। मुझे पूरा भरोसा था कि मैं आने वाले कुछ वर्षों में टीम इंडिया के लिए खेल सकता हूं। मैं कम से कम सौ और विकेट तो ले ही सकता था। लेकिन मुझे टीम से बाहर कर दिया गया। ।

भज्जी ने कहा कि मुझे टीम में सेलेक्ट ही नहीं किया जाता था। इस सिलसिले में मैंने खुद एमएस धोनी से जा कर बात की थी। मैंने अपनी बात भी रखी, लेकिन धोनी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद मैंने किसी से कुछ कहना ही छोड़ दिया। भज्जी ने कहा कि इस सवाल का जवाब उन्हें आज तक नहीं मिला है। यह आज भी उनके लिए अनसुलझी हुई पहेली है। 

दरअसल 2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे कई प्रमुख खिलाड़ी 2015 में ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड में हुए वर्ल्ड का हिस्सा नहीं रह पाए। युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और गौतम गंभीर जैसे खिलाड़ी टीम से बाहर कर दिए गए। कई मौकों पर ये सभी खिलाड़ी इस संबंध में अपना आक्रोश जाहिर कर चुके हैं कि उन्हें वर्ल्ड कप के बाद ही दरकिनार किया जाने लगा। क्योंकि टीम मैनेजमेंट को यह लगता था कि ये खिलाड़ी अगले वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा नहीं रह पाएंगे। जबकि इन खिलाड़ियों में अब भी क्रिकेट खेलने की क्षमता बची हुई थी। 

2015 के वर्ल्ड कप में कई खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा नहीं रह पाएंगे, इस बात के संकेत भी काफी पहले मिलना शुरू हो गए थे। 2012 में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और श्रीलंका के साथ हुई त्रिकोणीय श्रृंखला में कप्तान धोनी की रोटेशन पॉलिसी ने टीम इंडिया में जारी मतभेद को भी उजागर कर दिया था। 

त्रिकोणीय श्रृंखला में सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर तीनों ही भारतीय टीम का हिस्सा थे। लेकिन टीम में रोटेशन पॉलिसी लागू होने की वजह से भारतीय टीम इनमें से दो ही खिलाड़ियों के साथ मैच खेला करती थी। इस सिलसिले में जब खुद धोनी से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछा गया था तब धोनी ने लचर फिल्डिंग का हवाला तक दे दिया था। उस वक्त यह चर्चा आम थी कि खुद धोनी की यह दलील है कि चूंकि अगला वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया में ही होना है इसलिए वे युवा खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मौके देना चाहते हैं ताकि अगले वर्ल्ड कप के लिए वे खुद को तैयार कर सकें।

उसी सीरीज के बीच में ही स्लो ओवर रेट के चलते धोनी पर प्रतिबंध लग गया और भारतीय टीम की कमान वीरेंद्र सहवाग को मिली। बतौर कप्तान प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहवाग से जब धोनी द्वारा की गई लचर फिल्डिंग की टिप्पणी के बारे में पूछा गया तब सहवाग ने धोनी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों से कुछ नहीं बदला है, हम ऐसे ही खेलते आ रहे हैं। मिड विकेट पर पकड़े गए अपने कैच का उल्लेख करते हुए सहवाग ने पत्रकारों से यह तक कह डाला था कि क्या आपने मेरा कैच देखा था? 

टीम इंडिया में दरार पड़ने की चर्चा एक बार फिर आम हो चुकी थी। हालांकि प्रतिबंध खत्म होने के बाद धोनी टीम में वापस आए और जब भारतीय टीम त्रिकोणीय सीरीज से बाहर होने की कगार पर पहुंची तब रोटेशन पॉलिसी को त्यागने पर टीम मैनेजमेंट को मजबूर होना पड़ा। लेकिन विश्व कप विजेता टीम के यह सभी खिलाड़ी एक एक कर टीम से बाहर होते चले गए।