भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. स्वाति मोहन ने नासा में रचा इतिहास

डॉक्टर स्वाति मोहन ने मंगल ग्रह पर रोवर की ऐतिहासिक लैंडिंग सफलता पूर्वक करवाने में अहम भूमिका निभाई, लैंडिंग के दौरान पूरी दुनिया की नजर उन पर थी

Updated: Feb 19, 2021, 11:53 PM IST

भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. स्वाति मोहन ने नासा में रचा इतिहास
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भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक डॉक्टर स्वाति मोहन के नाम की चर्चा दुनिया भर में हो रही है। हो भी क्यों ना उनकी लीडरशिप में ही NASA के रोवर पर्सेवरेंस ने मंगल ग्रह पर ऐतिहासिक लैंडिंग सफलता के साथ पूरी की है। 30 जुलाई 2020 को लॉन्च किया गया नासा का यह रोवर गुरुवार 18 फरवरी 2021 को मंगल ग्रह की सतह पर पहुंचा। यह मंगल ग्रह पर जीवन के संकेतों की खोज करेगा और 2031 में धरती पर लौटेगा।

 मंगल ग्रह पर भेजे गए रोवर पर्सेवरेंस की सफलता में स्‍वाति मोहन का अहम योगदान है। वे नासा की जेट प्रपल्‍शन लैब में इस प्रोग्राम की नेवीगेशन गाइडेंस और कंट्रोल ऑपरेशन (GNC) की प्रमुख हैं। अमेरिकी रोवर की लैंडिंग के दौरान स्वाति कंट्रोल रूम में थीं, और शांत भाव से GN&C सिस्टम और प्रोजेक्ट टीम से बातचीत कर कोआर्डिनेशन का काम कर रही थीं। नासा का रोवर जेट प्रपल्‍शन लैब में ही तैयार हुआ है। यह कई वर्षों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।

स्‍वाति इस टीम से आठ साल से जुड़ी हैं। इस मिशन की लैंडिंग की जिम्मेदारी उनकी थी। नासा का मार्स पर्सेवरेंस रोवर कब कैसे और किस स्पीड में कहां लैंड करेगा। उसकी हाइट और स्पीड क्या होगी। इस सब का कंट्रोल स्वाति और उनकी मेहनती टीम ने किया। यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने अपनी योग्यता दिखाई हो, इससे पहले वे नासा के कैसिनी मिशन जो कि शनि ग्रह पर भेजा गया था। और चांद पर भेजे गए GRAIL मिशन में शामिल थीं।

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स्वाति ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल एंड एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है। फिर मैसेच्यूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी की उपाधि हासिल की। जब वे 8 साल की थी तब उनका परिवार भारत से अमेरिका जाकर वहीं बस गया था। उत्तरी वर्जीनिया-वाशिंगटन डीसी में उनका बचपन बीता। पहले वे बच्चों की डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। 16 साल की उम्र से स्वाति की दिलचस्पी अंतरिक्ष विज्ञान की ओर हो गई। स्वाति के मुताबिक वे लकी थीं कि उन्हें फिजिक्स के एक अच्छे टीचर मिले, जिनसे वे काफी प्रेरित हुईं। इसी वजह से उन्होंने डॉक्टर की जगह इंजीनियर बनने की ठान ली औऱ आज कई अहम प्रोजेक्टस को लीड कर रही हैं।

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स्वाति मोहन की ही तरह नासा में भारतीय मूल की कई महिलाएं काम कर रही हैं। हाल ही में भारतीय मूल की भाव्या लाल को अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कार्यकारी प्रमुख बनाया गया है। उन्हें बजट और फाइनेंस पर सीनियर एडवाइजर की जिम्मेदारी भी दी गई है। भाव्या लाल को इंजीनियरिंग और स्पेस टैक्नोलॉजी में महारत हासिल है। भारतीय मूल की महिलाएं अंतरिक्ष के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर देश का नाम ऊंचा कर रही हैं।