राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में बिखरे कला संस्कृति के रंग, 7 देशों समेत देश के 27 राज्यों की प्रस्तुति

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि भारत की कई स्वदेशी जनजातियों का घर छत्तीसगढ़ है, जो देश की जीवंत संस्कृति में योगदान करते हैं, इस पर हमें बहुत गर्व है।

Publish: Oct 29, 2021, 02:46 PM IST

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में बिखरे कला संस्कृति के रंग, 7 देशों समेत देश के 27 राज्यों की प्रस्तुति
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में इनदिनों राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की धूम मची हुई है। शुक्रवार को कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी शिरकत करेंगे। शुक्रवार को आदिवासी नृत्य महोत्सव में नाइजीरिया, फिलिस्तीन और श्रीलंका समेत देश के कई राज्यों के आदिवासी नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति होगी।

गुरुवार को राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव एवं राज्योत्सव 2021 का भव्य शुभारंभ हुआ। जिसमें 7 देशों समेत देश के 27 प्रदेशों समेत  06 केंद्र शासित प्रदेशों के कलाकार भाग ले रहे हैं। उद्घाटन समारोह में देश विदेश के नर्तक दलों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ आकर्षक मार्च पास्ट किया और अपने संस्कृति का परिचय दिया। गुरुवार को आयोजन में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि थे। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्यपाल अनुसुइया उइके भी शामिल हुईं।

इस कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ भारत की कई स्वदेशी जनजातियों का घर है, जो राज्य की जीवंत संस्कृति में योगदान करते हैं, जिस पर हमें बहुत गर्व है। राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव आदिवासी संस्कृति की विशिष्टता को बढ़ावा देगा और मनाएगा और छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी जीवन की समृद्धि और विविधता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगा।

सीएम भूपेश बघेल ने आदिवासियों के लिए राज्य चलाई जाने वाली योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गौठान के माध्यम से दो रुपया प्रति किलो गोबर खरीदा जा रहा हैं, लघु वनोपज से जुड़े उद्योग लगाने की योजना है। वहीं सरकार ने आदिवासी संस्कृति से जुड़े हरेली, तीहा, विश्व आदिवासी दिवस, छठ पूजा के साथ अब छेर छेरा पुन्नी के दिन की छुट्टी की घोषणा की है।

संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति के मूर्त और अमूर्त भागों को बढ़ावा देने की पहल विकसित करना है। इससे आदिवासी विरासत को संरक्षित किया जा सकेगा। राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव एक अनूठा उत्सव है जो न केवल विभिन्न आदिवासी नृत्यों के रूपों का प्रदर्शन है, बल्कि हमारे संरक्षण और प्रचार में भी मदद करेगा।