कालाधन वापसी का वादा: कोरोना काल में ब्लैक मनी डिपॉजिट में टूटे 13 साल के रिकॉर्ड

स्विस बैंकों में तेजी से बढ़े भारतीयों के पैसे, 20 हजार 700 करोड़ रुपए जमा, साल 2020 में कालाधन जमा करने के मामले में टूटे 13 साल के रिकॉर्ड

Updated: Jun 18, 2021, 01:51 PM IST

कालाधन वापसी का वादा: कोरोना काल में ब्लैक मनी डिपॉजिट में टूटे 13 साल के रिकॉर्ड
Photo Courtesy: Prabhat khabar

नई दिल्ली। अवैध रूप से कमाए गए पैसों को स्विस बैंकों में रखने का भारत में पुराना चलन है। इन पैसों को आमतौर पर ब्लैक मनी या कालाधन कहते हैं। देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 का चुनाव कालाधन के मुद्दे पर लड़ा था और 100 दिनों में इसे वापस लाने का वादा किया था। हालांकि, मोदी के 7 साल के कार्यकाल में कालाधन में कमी होने के बजाए जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी सालाना आंकड़ों के मुताबिक 'स्विस बैंकों में भारतीयों का निजी और संस्थागत एमाउंट 2020 में बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ्रैंक (20,700 करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंच गया है। यह वृद्धि नकद जमा के तौर पर नहीं बल्कि प्रतिभूतियों, बांड समेत अन्य वित्तीय उत्पादों के जरिए रखी गई होल्डिंग से हुई है। स्विस बैंकों में यह कोष भारत स्थित शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए रखा गया धन हैं।'

रिपोर्ट्स के मुताबिक स्विस बैंकों में भारतीय ग्राहकों का सकल कोष यानी कुल धन 2019 के अंत में 89.9 करोड स्विस फ्रैंक (6,625 करोड़ रुपये) था। यह 2020 में बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ्रैंक पर पहुंच गया। हालांकि इससे पहले लगातार दो साल तक इसमें गिरावट दर्ज की गयी थी। साल 2020 का आंकड़ा पिछले 13 साल का सर्वाधिक है। और हैरान करने वाली बात है कि कोरोना काल ने जब सभी तरह के उद्योग और व्यवसाय ठप पड़े थे, तब भारतीयों ने ब्लैक मनी जमा कराने में 13 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

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स्विस बैंकों में जमा काला धन में बढ़ोतरी की खबर आने के बाद मोदी सरकार के दावों और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इस बात को लेकर सवाल कर रहे हैं की जब देश की जीडीपी माइनस में चली गयी थी तब कालेधन में बढ़ोतरी कैसे हुई? कांग्रेस नेता वैभव वालिया ने ट्वीट किया, 'जो लोग स्विस बैंक में जमा काला धन वापस लाकर भारत में लोगों को पंद्रह लाख बाँटने वाले थे उनके राज में काला धन बढ़ गया। झूठे वादों वाली भाजपा आपको बेवक़ूफ़ बनाकर वोट तो हथिया लेती है परंतु देश चलाने के लिए जैसे क़ाबिल लोग चाहिए वो उनके पास हैं ही नहीं। दुर्भाग्यवश देश पीछे जा रहा है।' 

स्विस नेशनल बैंक (SNB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2006 में यह करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकॉर्ड स्तर पर था। उसके बाद इसमें साल 2011, 2013 और 2017 में बढ़ोतरी हुई। साल 2020 के अंत में भारतीय ग्राहकों पर स्विस बैंकों की कुल देनदारी 255.47 करोड़ सीएचएफ (स्विस फ्रैंक) है। इसमें 50.9 करोड़ स्विस फ्रैंक (4,000 करोड़ रुपये से अधिक) ग्राहक जमा के रूप में है। वहीं 38.3 करोड़ स्विस फ्रैंक (3,100 करोड़ रुपये से अधिक) अन्य बैंकों के जरिए रखे गए हैं।