मंदसौर: लहसुन किसानों को फायदा तो दूर लागत मूल्य का भी संकट, रेट बढ़ने नहीं दे रहे व्यापारी

मध्य प्रदेश के मंदसौर मंडी में लहसुन की बंपर आवक, थोक में डेढ़ से दो हजार रुपए क्विंटल ही रेट दे रहे व्यापारी, लागत से भी कम मूल्य में उपज बेचने को मजबूर हैं किसान

Updated: Dec 23, 2021, 03:02 PM IST

मंदसौर: लहसुन किसानों को फायदा तो दूर लागत मूल्य का भी संकट, रेट बढ़ने नहीं दे रहे व्यापारी

मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर, उज्जैन व अन्य जिलों में इस बार लहसुन की बंपर पैदावार हुई है। हालांकि, अच्छी उपज होने के बावजूद किसानों की परेशानियां खत्म नहीं हो रही है। दरअसल, मंडी में लहसुन का रेट लागत मूल्य से भी कम मिल रहा है।

जानकारी के मुताबिक मंदसौर कृषि उपज मंडी में उज्जैन जिले से लेकर पड़ोसी राज्य राजस्थान के झालावाड़ से भी किसान अपनी उपज लेकर आते है। इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है कि यहां उपज के अच्छे भाव मिलते है। लेकिन लहसुन के किसानों को यहां उपज लाना भारी पड़ रहा है। क्योंकि व्यापारी रेट चढ़ने नहीं दे रहे हैं और उन्हें लागत मूल्य से भी कम दाम मिल रहा है।

बुधवार को यहां लहसुन का रेट 500 रुपए से लेकर 2000 रुपए क्विंटल तक रहा। जबकि मंदसौर में ही खुले में लहसुन 80-100 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। मंडी में एक किसान गोपाल ने बताया कि वह तीन दिनों से मंडी में हैं। गुरुवार को लहसुन बेच पाए और वह भी 1760 रूपए प्रति क्विंटल के दर से। इससे काफी नुकसान हुआ, फायदा तो दूर लागत मूल्य भी नहीं निकल पाया है। साथ ही लहसुन को लाने में अलग से खर्चा हो गया है। किसान के मुताबिक इस बार भाव अधिक होते तो उन्हें फायदा होता।

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बीते शनिवार यहां एक किसान ने जय जवान, जय किसान और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ मंडी के भीतर अपनी ही उपज में आग लगा दिया था। बताया गया कि आग लगाने वाला किसान उपज की सही कीमत नहीं मिलने से परेशान था। उज्जैन जिले देवली गांव के निवासी किसान शंकर मंदसौर के कृषि उपज मंडी में लहसुन बेचने के लिए आए थे लेकिन उन्हें लहसून की कीमत 1100 रुपए प्रति क्विंटल ही मिली जबकि उज्जैन से उपज लाने में खर्च ही पांच हजार रुपए हो गया था। किसान के मुताबिक उन्होंने लहसून की फसल में करीब ढाई लाख रुपए खर्च किया, लेकिन रेट के हिसाब से उन्हें महज एक लाख रुपए मिल रहे थे। ऐसे में उन्हें डेढ़ लाख रुपए का नुकसान हो रहा था।