सतना के किसान ने खेत में बनाया औषधीय पौधों का म्यूजियम, पीएम मोदी ने की तारीफ

सतना के उचेहरा ब्लॉक के रहने वाले रामलोटन कुशवाह ने औषधीय पौधों का म्यूजियम बनाकर पीएम को प्रभावित किया.. औषधीय म्यूजियम में करीब 250 प्रकार के विलुप्त हो रहे पौधों की प्रजाति

Updated: Jun 27, 2021, 10:13 PM IST

सतना के किसान ने खेत में बनाया औषधीय पौधों का म्यूजियम, पीएम मोदी ने की तारीफ
Photo Courtesy: Dainik Bhaskar

सतना/भोपाल। दिल्ली की सीमाओं पर पिछले सात महीने से जारी किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को अपने मन की बात कार्यक्रम में औषधीय पौधों की विलुप्त हो रही प्रजातियों का संरक्षण करने वाले एक किसान की चर्चा की। प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश के सतना के रहने वाले किसान रामलोटन कुशवाह का उदाहरण देते हुए बताया कि रामलोटन कुशवाह ने अपनी एक एकड़ की भूमि को औषधीय पौधों के म्यूजियम में तब्दील कर दिया है। 

औषधीय पौधों का म्यूजियम बनाने वाले किसान रामलोटन कुशवाह सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक के अतरवेदिया गांव के रहने वाले हैं। रामलोटन कुशवाह के म्यूजियम में करीब 250 प्रकार के औषधीय पौधे और उनके बीज हैं। यह सब रामलोटन विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित कर लाए हैं। जिन औषधीय पौधों का संरक्षण रामलोटन कर रहे हैं, वे सभी मौजूदा वक्त में विलुप्त हो रही हैं। 

रामलोटन कुशवाह के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि रामलोटन जी से लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए और खुद भी रामलोटन जैसा कार्य करना चाहिए। वहीं राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान की तारीफ करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के सतना ज़िले के किसान भाई श्री रामलोटन कुशवाहा जी ने एक देशी म्यूज़ियम बनाया है जिसमें उन्होंने सैकड़ों औषधीय पौधों और बीजों का संग्रह किया है। इन्हें वह सुदूर क्षेत्रों से लेकर आये हैं। इसके अलावा वे कई तरह की सब्जियां भी उगाते हैं। 

रामलोटन बताते हैं कि उन्हें इस चीज की प्रेरणा गांव के एक वैद्य के सुझाव के बाद मिली। रामलोटन खुद पढ़े लिखे नहीं हैं, लेकिन औषधीय पौधों को जमा करने का शौक इनके इतना सिर चढ़कर बोलता है कि कब इनका समय पौधों और बीज की देखरेख में बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। रामलोटन बताते हैं कि उनके म्यूजियम को देखने के लिए दूर दराज के इलाकों से लोग आते हैं। 

जड़ी बूटियों के प्रति रामलोटन के मन में दिलचस्पी का सबसे बड़ा कारण उनके पिता रहे। पिता का आयुर्वेद के प्रति प्रेम देखकर रामलोटन भी जड़ी बूटियों में दिलचस्पी लेने लगे। हालांकि बचपन में ही रामलोटन के सिर से उनके पिता का हाथ उठ गया। लेकिन रामलोटन ने जड़ी बूटियों की खोज जारी रखी। वे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में जड़ी बूटी की तलाश में गए ही साथ ही जड़ी बूटी की खोज उन्हें हिमालय तक ले गई। रामलोटन के पास हिमालय से लाई हुई ब्राह्मी औषधि भी है।

रामलोटन के पास सुई धागा नामक एक जड़ी बूटी भी है। इस जड़ी बूटी को प्राचीन काल में राजा महाराजा युद्ध के दौरान घायल हो जाने के बाद किया करते थे। सुई धागा जड़ी बूटी का उपयोग जख्म को भरने में किया जाता था। रामलोटन बताते हैं कि उन्हें इन जड़ी बूटियों का ज्ञान जंगल में रहने वाली जनजाति बेगाओं से मिला। रामलोटन अमूमन जड़ी बूटियों की जानकारी लेने जाते रहते हैं, और वे भी प्रायः रामलोटन के पास आते रहते हैं। 

रामलोटन की एक बेटी और तीन बेटे हैं। बेटी की शादी हो चुकी है जबकि बड़े बेटे को छोड़कर दोनों बेटे भी पिता के ही साथ औषधियों के उनके काम को आगे बढ़ाने में रामलोटन की मदद कर रहे हैं।