रीवा में ख़रीद केंद्र पर भुगतान में धांधली का आरोप, सैकड़ों किसानों की मेहनत पर डाका

रीवा जिले के धान खरीद केंद्र पर 300 से ज़्यादा किसानों का भुगतान नहीं किए जाने पर बोली कांग्रेस, जब सरकार का ये हाल है तो अदाणी क्या करेंगे

Updated: Dec 21, 2020, 05:39 PM IST

रीवा में ख़रीद केंद्र पर भुगतान में धांधली का आरोप, सैकड़ों किसानों की मेहनत पर डाका
Photo Courtesy: Haribhoomi

भोपाल/रीवा। रीवा जिले में सरकारी खरीद केंद्र में धान खरीद के भुगतान में भारी धांधली करके किसानों की मेहनत की कमाई लूट लिए जाने का आरोप लगा है। आरोप है कि 300 से अधिक किसानों से धान खरीदे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इस मामले में कांग्रेस ने शिवराज सरकार पर तीखा हमला बोला है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा है कि जब राज्य सरकार और उसके अधिकारी किसानों का धान लूट रहे हैं तो इस क्षेत्र में उद्योगपतियों के आने पर किसानों का क्या हश्र होगा? 

दरअसल रीवा ज़िले के एक खरीद केंद्र पर 328 किसानों का धान तौल कर खरीदा गया था। किसानों का कहना है कि केंद्र के अधिकारियों ने ऑनलाइन पोर्टल के बंद होने का हवाला देते हुए धान खरीद का रिकॉर्ड हाथ से दर्ज किया। आरोप है कि 3 जून 2020 को किसानों से खरीदे गए धान को अधिकारियों ने व्यापारियों को बेच भी दिया। लेकिन किसानों को धान का भुगतान अब तक नहीं किया गया। पीड़ित किसानों को यह मामला लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक जाना पड़ा। हाई कोर्ट ने मामले से संबंधित अधिकारियों से 6 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। 

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसी मसले को उठाते हुए शिवराज सरकार और कृषि कानूनों पर जमकर हमला बोला है। केके मिश्रा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसते हुए ट्वीट किया है कि 'किसानपुत्र शिवराजजी,रीवा जिले के खरीदी केंद्र क्र-3 में तीन सौ से अधिक किसानों के साथ धान की हुई लूट,समर्थन मूल्य पर धान खरीदी गई,टोकन दिया,पावती नहीं दी,अब अफसर भुगतान भी नहीं कर रहे!1300 क्विं.धान गायब,जब सरकार के यह हाल हैं,तो अडानी क्या करेंगे?' 

 

 

क्या है पूरा मामला

31 जनवरी 2020 को रीवा ज़िले के त्योथर तहसील के मांगी खरीदी केंद्र पर 328 किसानों का धान तौलकर खरीदा गया। केंद्र के अधिकारियों ने किसानों से कहा कि अभी ऑनलाइन पोर्टल बंद है, लिहाज़ा उन्होंने धान खरीद के रिकॉर्ड को रिकॉर्ड मैन्युअल में दर्ज कर दिया। किसानों को कहा गया कि जब पोर्टल चालू हो जाएगा तो इसका डेटा पोर्टल में फीड कर दिया जाएगा। किसानों का आरोप है कि इसके बाद उन्हें धान खरीद का भुगतान नहीं किया गया और 3 जून 2020 को धान चोरी छिपे व्यापारियों को बेच दिया गया।

इतना ही नहीं इसके बाद खरीदी केंद्र के अधिकारियों ने सोहागी थाने में किसानों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी कि किसान ही धान लूटकर ले गए हैं। किसानों का आरोप है कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर इसलिए दर्ज कराई गई ताकि धान का भुगतान न करना पड़े। अब ये पूरा मामला मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में है। किसानों की ओर से भारतीय किसान यूनियन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। हाई कोर्ट ने इस मामले में प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, महाप्रबंधक और नियंत्रक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग रीवा और थाना प्रभारी सोहागी ने भी नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब-तलब किया है।