कला और वैभव की साक्षी

बुंदेलखंड के वैभव का प्रतीक ओरछा नगर में बेतवा नदी के किनारे कंचना घाट के आसपास बनी 15 बुन्देली राजपूत राजाओं की छतरियां कला और वास्तु की दृष्टि से बहुत आकर्षक हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय ये विशाल छतरियां सुंदर लगती हैं।


Updated: May-22, 2020, 05:23 PM IST

पूर्वजों की स्‍मृति में बनवाई गई हैं छतरियां
1 / 1

1. पूर्वजों की स्‍मृति में बनवाई गई हैं छतरियां

ओरछा को बुंदेला राजपूत राजा रूद्र प्रताप सिंह ने बेतवा नदी के किनारे 1531 में बसाया था। ओरछा में प्रवेश करते ही एक तरफ बेतवा नदी और दूसरी तरफ ऊँचे बड़े महल, मंदिर और छतरियां दिखाई पड़ने लगती हैं। छतरी का अर्थ है स्मारक। राजाओं या शाही परिवार जनों की मृत्यु के बाद उनके पुत्रों या पौत्रों द्वारा ये स्मारक बनाए गए थे।