World Cancer Day: मैं हूं और मैं रहूंगा की सार्थक सोच देने का दिन

ICMR और NCDIR के आकलन के अनुसार 2025 तक देश में 15.7 लाख हो सकती है कैंसर मरीजों की संख्या सिर, मुंह और गर्दन में कैंसर के 75 प्रतिशत मामलों की वजह तंबाकू और गुटका और शराब है

Updated: Feb 04, 2021, 04:51 PM IST

World Cancer Day: मैं हूं और मैं रहूंगा की सार्थक सोच देने का दिन
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आईसीएमआर और एनसीडीआईआर नेशनल सेंटर फॉर डिसीज इन्फोर्मेटिक्स एंड रिसर्च के एक आकलन के अनुसार 2025 भारत में कैंसर रोगियों की संख्या 15.7 लाख होने की आशंका है। फिलहाल भारत देश में करीब 13.9 लाख कैंसर मरीज हैं। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में देश में करीब 8.37 लाख लोगों ने कैंसर की वजह से दम तोड़ा है। जिसमें से करीब 16 लाख से ज्यादा लोग कैंसर के थर्ड स्टेज में थे। इलाज कराने पहुंचे औऱ जिंदगी की जंग हार गए। साल 2020 में कोरोना और कैंसर दोनों ने मिलकर लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दिया। कैंसर कितना भयावह है यह केवल इसकी बानगी है।

4 फरवरी 1993 में हुई वर्ल्ड कैंसर डे की शुरुआत

लोगों को कैंसर के खतरों के प्रति जागरुक करने के लिए 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को कैंसर के खतरों से सजग करना है। कैंसर के कारण, लक्षण, और बचाव के तरीकों के बारे में जागरुक करने के लिए इस दिन को मानाने की शुरुआत हुई थी। साल 2019 से 2021 तक के लिए विश्व कैंसर दिवस की थीम 'मैं हूं और मैं रहूंगा' रखी गई है। सबसे पहले 4 फरवरी साल 1993 में जिनेवा, स्विट्जरलैंड में यूनियन फॉर इंटरनेशल कैंसर कंट्रोल ने विश्व कैंसर दिवस मनाया था, जिसके बाद से यह पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा है।

कैंसर से बचना है, तो तंबाकू से करें तौबा

कैंसर बीमारी के चार स्टेज होते हैं, अगर इस बीमारी का पता शुरुआती दौर में चल जाए तो मरीज काफी हद तक स्वस्थ रह सकता है। भारत में कई तरह के कैंसर पाए जाते हैं इनमें स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, लिवर कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, ओवरी कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ब्रेन कैंसर, बोन कैंसर, मुंह का कैंसर और लंग्स का कैंसर शामिल है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, शराब से मुंह और लंग्स का कैंसर हो सकता है, शराब पीने से लिवर कैंसर की संभावना बढ़ जाती है, स्तन कैंसर, हेरीडिटी और खराब लाइफ स्टाइल की वजह से होता है। तंबाकू में निकोटिन के अलावा 300 प्रकार के एलीमेंट होते हैं जिससे कैंसर होता है।

 कैंसर से बचने के लिए क्या खाएं, क्या ना खाएं

अगर आप कैंसर से बचाव करना चाहते हैं, तो खाने पीने की आदतों में थोड़ा बदलाव करके सेहतमंद रह सकते हैं। मैदा, प्रोसेस्ड फूड, तली हुई चीजें, प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट, शुगर, माइक्रोवेव पॉपकार्न से तौबा कर लें। वहीं एक कप कॉफी रोज पीने से प्रोस्टेट समेत कई तरह के कैंसर का खतरा 10 फीसदी तक कम किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो ऑर्गेनिक फूड्स, ताजे फल, सब्जियां खाने से इसका खतरा कम होता है। खाने में सभी रंगों के फल और सब्जियों का उपयोग करना चाहिए।

 

पत्ता गोभी, ब्रोकली, हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, पालक, प्याज, अदरक, लहसुन मेथी, बीन्स, चुकंदर का उपयोग करना फायदेमंद होता है। वहीं संतरा, खरबूजा और स्ट्रॉबेरी में पाए जाने वाले तत्व कैंसर रोधी होते हैं। वहीं अंडा, सूरजमुखी के बीज और पालक से मिलने वाला फोलेट भी कैंसर से बचाव करने में कारगर होता है।खाने का तेल बदलते रहें एक जैसा तेल हमेशा उपयोग नहीं करें। सोया, सरसों के तेल की जगह पर नारियल या ऑलिव ऑयल का यूज करें। वैसे तेज की जगह घी ज्यादा बेहतर आप्शन होता है।

 कैंसर के लक्षणों को ना करें नजरअंदाज

शरीर में दिनभर थकान, बिना कारण वजन कम होना, कमजोरी, नींद की कमी, त्वचा के रंग में बदलाव, गठान, चकत्ते होना, ब्लीडिंग होना, इलाज करवाने के बाद भी खाना निगलने में तकलीफ होना। आराम करने के बाद भी कमजोरी दूर नहीं होना। पीरियड्स का अनियमित होना, पेट दर्द का लंबे समय तक रहना कैंसर का लक्षण हो सकते हैं, इनकी अनदेखी नहीं करना चाहिए।

वक्त पर इलाज और पॉजिटिव सोच से जीतेंगे कैंसर की जंग

वजन पर नियंत्रण, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त मात्रा में आराम, समय पर नींद लेने औऱ नियमित दिनचर्या से कैंसर समेत कई रोगों से आसानी से बचा जा सकता है।पहले कैंसर को एक लाइलाज बीमारी कहा जाता था, लेकिन अब कैंसर इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आया है, नई खोज औऱ नई दवाओं से इलाज आसान हुआ है। अगर वक्त पर शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान हो जाए तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। बस जरूरत है कि सही इलाज, खानपान के साथ सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ा जाए।