WHO का दावा स्मोकिंग करने वालों में कोरोना से मौत का खतरा 50 फीसदी से ज्यादा

भारत में स्मोकिंग से हर साल 9.30 लाख, और तंबाकू से 3.50 लाख लोगों की होती है मौत, इन लोगों में कोरोना भी हो रहा जानलेवा

Updated: May 31, 2021, 01:43 PM IST

WHO का दावा स्मोकिंग करने वालों में कोरोना से मौत का खतरा 50 फीसदी से ज्यादा
Photo courtesy: The Guardian

विश्व स्वास्थ्य संगठन का दावा है कि स्मोकिंग करने वालों में कोरोना से मौत का खतरा अन्य लोगों से ज्यादा रहता है। सिगरेट स्मोकिंग की वजह से फेफड़ों को भारी नुकसान होता है। वहीं कोरोना भी फेफड़ों को ही अपनी चपेट में लेता है। स्मोकिंग की वजह से कोरोना से मौत का खतरा 50 प्रतिशत ज्यादा बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक के हालिया बयान में कहा गया है कि स्मोकिंग करने वाले कोरोना मरीजों के ज्यादा सीरियस होने और मौत का जोखिम 50 फीसदी तक ज्यादा होता है।

WHO ने कोविड 19 का खतरा कम करने के लिए स्मोकिंग से दूरी बनाने की एक बार  फिर अपील की है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत में 27 करोड़ से ज्यादा लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। स्मोकिंग से भारत में हर साल 9.30 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। वहीं तंबाकू खाने से साढ़े तीन लाख लोगों की मौत होती है।

लोगों को तंबाकू खाने और स्मोकिंग की ऐसी लत है कि दुनिया इधर की उधर हो जाए वे सिगरेट और तंबाकू का सेवन से बाज नहीं आते। जबकि वे इससे होने वाले नुकसानों से भलीभांति परिचित होते हैं। नो टोबेको डे पर देश के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन का एक संदेश भी लोगों का ध्यान खींच रहा है, जिसमें कहा गया है कि तंबाकू का यूज करने वाले खासकर स्मोकिंग करने वालों में कोरोना की वजह से ज्यादा कॉम्प्लीकेशन का सामना करना पड़ा है। धूम्रपान करने वालों की मौत भी बड़ी संख्या में हुई है। क्योंकि स्मोकिंग करने वालों में कोरोना के दौरान जान जाने का जोखिम 50% ज़्यादा होता है। तंबाकू के सेवन से लंग्स, हार्ट और कैंसर जैसी बीमारियां ही नहीं बल्कि शरीर का हर अंग प्रभावित होता है।तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक करने के लिए नो टोबैको डे की शुरुआत

तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नो टोबैको डे की शुरुआत साल 1987 में की थी। जिसके बाद 1988 में एक और प्रस्ताव पारित कर 31 मई को नो टोबैका डे मनाया जाने लगा।

WHO की मानें तो तंबाकू हर साल दुनिया भर में करीब 8 मिलियन से ज्यादा लोगों की जान लेता है। इस साल वर्ल्ड नो टोबैको डे की थीम "तंबाकू छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध" रखी गई है। इसका  उद्देश्य लोगों को इनके नशे से दूर रखने की कोशिश करना है। बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू के नशा लंग्स को बहुत नुकसान पहुंचता है। इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए जानलेवा है। जरूरी है कि स्मोकिंग की लत को जितनी जल्दी हो सके छोड़ देना चाहिए।

किसी भी लत को छोड़ने के लिए काफी मेहनत और कड़े  संकल्प की आवश्यकता होती है। ऐसे में चंद घरेलू नुस्के आपके काम आ सकते हैं। कहा जाता है कि शहद, तुलसी, अजवाइन, सौंफ, खट्टे फल, दालचीनी, आंवला, हरड़ और बहेरा का चूर्ण याने त्रिफला के उपयोग से तंबाकू की लत से छुटकारा पाया जा सकता है।

आयुर्वेद में त्रिफला को बेदह गुणकारी माना गया है,यह आंवला, हरड, बहेरा को सुखाकर पीसकर बनाया जाता है, इसके सेवन से कब्ज एसीडिटी की समस्या तो दूर होती ही है, यह बाडी के टॉक्सीन्स को साफ करता है। तंबाकू की तलब कम करने में हेल्पफुल है। रोजाना रात में एक बड़ा चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी के साथ लेने से तंबाकू की लत से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। गुणों की खान तुलसी भी स्मोकिंग की लत छुड़ाने में मददगार है, तुलसी की पत्तियां चबाने से स्मोकिंग या तंबाकू की क्रेविंग कम की जा सकती है।

वहीं सीट्रस फलों में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है। संतरा, मौसमी, नींबू जैसे फलों के उपयोग से इन समस्यों से बचा जा सकता है। खट्टे फलों में मिलने वाले न्यूट्रीशियन्स स्मोकिंग की लत कम करने में मदद करते हैं। सौंफ, अजवाइन और दालचीनी रसोई में आसानी से मिल जाते हैं। ये दोनों खाने का टेस्ट बढ़ाने के साथ-साथ तंबाकू की लत छोड़ने में हेल्पफुल हैं। जब भी क्रेविंग हो आप सौंफ अजवाइन और दालचीनी में से जो भी आपके पास मौजूद हो उसे मुंह में रखें और चूसें।

आप पाएंगे की धीरे-धीरे आपकी तंबाकू की लत छूट जाएगी। ये सभी चीजें  सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। वहीं शहद का इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इनमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स, एंजाइम और प्रोटीन पाए जाते हैं, जिनकी मदद से स्मोकिंग आसानी से छोड़ी जा सकती है। इन सब नुस्खों के साथ आपका स्मोकिंग छोड़ने का संकल्प बेहद जरूरी है, जिस पर आप हर हाल में कायम रहें।