ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रगान में बदलाव, मूल निवासियों की भावनाओं का ध्यान रखने की कोशिश

Australian Anthem: ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रगान में बदलाव मूलवासियों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए किया गया है फिर भी बहुत से लोगों का मानना है कि यह कदम सिर्फ प्रतीकात्मक है

Updated: Jan 03, 2021, 07:24 PM IST

ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रगान में बदलाव, मूल निवासियों की भावनाओं का ध्यान रखने की कोशिश
Photo Courtesy: Social media

नई दिल्ली। हाल ही में ऑस्ट्रलियाई सरकार ने अपने राष्ट्रगान ' एडवांस ऑस्ट्रलिया फेयर' की पहली लाइन में बदलाव करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 31 दिसंबर को एलान किया कि राष्ट्रगान की पहली लाइन में बदलाव किया जा रहा है। अब तक राष्ट्रगान की पहली लाइन में 'Australians all let us rejoice, for we are young and free' में 'यंग' की जगह अब 'वन' कर दिया जाएगा। 

इस बदलाव की वजह से अब राष्ट्रगान का स्वरूप हो जाएगा, 'फॉर वी आर वन एंड फ्री'। दरअसल ऑस्ट्रेलिया के मूलनिवासियों का एक तबका राष्ट्रगान की पहले वाली लाइन से देश का एक तबका खुश नहीं था। उनका मानना था कि राष्ट्रगान की पहली लाइन में यंग शब्द औपनिवेशिक काल के बाद के ऑस्ट्रेलिया को ही देश की पहचान मानता है और वहां के मूल निवासियों के हज़ारों साल पुराने इतिहास और संस्कृति की अनदेखी करता है। मूल निवासियों की इस भावना को सही मानने वाले लोग भी इस राय का समर्थन करते रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया की सरकार के ताज़ा फैसले में लोगों की इस भावना का सम्मान करने की कोशिश की गई है।

यह महज एक प्रतीकात्मक कदम है 

ऑस्ट्रेलियाई सरकार के इस फैसले का मूलवासियों के एक तबके ने तो स्वागत किया है, लेकिन एक तबका अब भी मानता है कि राष्ट्रगान का एक शब्द बदल देना काफी नहीं है। अंग्रेज़ी के एक प्रमुख अख़बार ने द गार्डियन के ऑस्ट्रेलियन संस्करण की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडीजिनस एक्स नामक के वेब पोर्टल के संपादक का कहना है कि सरकार का यह कदम महज़ प्रतीकात्मक है। ऐसा कहने वाले ल्युक पीयरसन खुद एक ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासी हैं। उनका कहना है कि सरकार ने यह फैसला देश में उठ रही असहमति की आवाज़ों को रोकने के लिए किया है। 

मूल निवासी समुदाय से आने वाले बॉक्सर एंथनी मुंडाइन भी मॉरिसन सरकार के इस फैसले से सहमति नहीं रखते। उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह राष्ट्रगान गोरों के वर्चस्व का गान रहा है। इसमें कोई खास बदलाव नहीं किया गया है। उन्हें 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलियन दिवस मनाए जाने पर भी एतराज़ है, क्योंकि इसी दिन सन् 1788 में पहला बेड़ा सिडनी हार्बर पहुंचा था। लिहाज़ा यहां के मूलवासी इस दिन को आक्रमण दिवस मानते हैं। ऑस्ट्रेलिया के मूलवासियों के अलावा कई विपक्षी दल भी इसे महज़ प्रतीकात्मक कदम बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। 

ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के विरोध से अलग कंजर्वेटिव पार्टी के नेता कुछ अलग ही वजहों से सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। कंजर्वेटिव पार्टी के मैथ्यू कानवान कहते हैं कि राष्ट्रगान में बदलाव करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसमें यंग शब्द इस बात का प्रतीक है कि ऑस्ट्रेलिया एक युवा देश है। यह पुरानी संस्कृतियों से दबा हुआ कोई देश नहीं है। लोग बाहर से ऑस्ट्रेलिया में इसीलिए आते हैं ताकि वे एक नई शुरुआत कर सकें।