अमेरिका-ईरान की जंग खत्म होने पर मुहर, डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति ने शांति समझौते पर किए दस्तखत
समझौते में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे के घरेलू मामलों में दखल भी नहीं देंगे।
अमेरिका-ईरान की जंग खत्म होने पर आधिकारिक रूप से मुहर लग गई है। आखिकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने शांति समझौते पर दस्तखत कर दिए। फ्रांस में चल रहा G-7 शिखर सम्मेलन उस पल का गवाह बना, जब ट्रंप ने वर्साय के महल में ईरान समझौते पर हस्ताक्षर किए।
ट्रंप ने इस समझौते पर उस डिनर के दौरान साइन किए जिसकी मेजबानी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ऐतिहासिक महल के अंदर की थी। यह पल अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को खत्म करने की दिशा में महीनों तक चली बातचीत के बाद एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि साबित हुआ। एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मैक्रों और अन्य मेहमानों के साथ डिनर टेबल पर बैठे ट्रंप पीस एग्रीमेंट की हार्ड कॉपी पर दस्तखत करते देखे जा सकते हैं। ट्रंप के हस्ताक्षर करते ही वहां मौजूद मेहमानों ने ताली बजाकर शांति के इस कदम का स्वागत किया।
ट्रम्प के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5.30 किया गया। इसके साथ ही शांति समझौता लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान में युद्ध खत्म होगा और लेबनान में भी संघर्ष खत्म किया जाएगा। वहीं, होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने की बात कही गई है।
इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विटजरलैंड में जेनेवा के पास लूसर्न शहर में साइन होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में इस पर दस्तखत कर दिए गए। समझौते के बाद ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया, तो उस पर फिर से बमबारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान समझौते के मसौदे में युद्ध खत्म करने, होर्मुज खोलने, तेल निर्यात, प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए फंड जारी करने समेत 14 पॉइंट्स पर सहमति बनी है। समझौते में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे के घरेलू मामलों में दखल भी नहीं देंगे। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा कि 300 अरब डॉलर के पैकेज की खबरें भ्रामक हैं। अगर ईरान शर्तें मानता है तो दूसरे देश निवेश कर सकते हैं, लेकिन अमेरिका पैसा नहीं देगा।




