ओमान के पास व्यापारिक जहाजों पर ईरान का हमला, तीन भारतीय नाविकों की हुई मौत
मस्कट से करीब 52 समुद्री मील दूर 'मार्शल आइलैंड' के झंडे वाले MV MKD Vyom तेल टैंकर पर विस्फोटकों से लदी एक मानवरहित नाव और ड्रोन से हमला किया गया।
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग की आग अब समुद्र में भारतीय नागरिकों तक पहुंच गई है। ओमान के तट के पास व्यापारिक जहाजों पर हुए ईरानी हमलों में अब तक तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे हजारों भारतीयों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिपिंग महानिदेशालय के अनुसार, ओमान के पास दो बड़े जहाजों को निशाना बनाया गया। सोमवार को मस्कट से करीब 52 समुद्री मील दूर 'मार्शल आइलैंड' के झंडे वाले MV MKD Vyom तेल टैंकर पर विस्फोटकों से लदी एक मानवरहित नाव और ड्रोन से हमला किया गया। इस धमाके से जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई।
इससे पहले रविवार को ओमान के खसाब पोर्ट के पास 'पलाऊ' के झंडे वाले Skylight टैंकर पर हमला हुआ। इसमें दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। इस जहाज पर मौजूद 21 क्रू मेंबर्स में से 16 भारतीय थे।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए शिपिंग महानिदेशालय ने एक 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' बनाई है, जो फंसे हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षित निकासी और उनके परिवारों से संपर्क बनाए रखने का काम करेगी। ओमान में भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर शवों को भारत भेजने और घायलों के इलाज की व्यवस्था कर रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी भी 'भारतीय झंडे' वाले जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन क्षेत्र में खतरा बरकरार है।
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से ईरान बेहद आक्रामक है। ईरान अब खाड़ी देशों और अमेरिका के सहयोगियों से जुड़े व्यापारिक जहाजों को ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस के जरिए निशाना बना रहा है। फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।
ईरान ने न केवल समुद्र में, बल्कि इराक, सऊदी अरब, जॉर्डन और कुवैत जैसे देशों में भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। अमेरिका ने भी संकेत दिए हैं कि इजरायल-ईरान युद्ध फिलहाल रुकने वाला नहीं है, जिससे मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों में भी हिंसा बढ़ने की आशंका है।




