इजरायल में नेतन्याहू का दौर खत्म, नाफ्ताली बेनेट बने देश के नए प्रधानमंत्री

इजरायल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता चली गई है, 12 साल बाद देश को नया पीएम मिला है, नाफ्ताली बेनेट इजरायल के पीएम चुने गए हैं

Updated: Jun 14, 2021, 09:25 AM IST

इजरायल में नेतन्याहू का दौर खत्म, नाफ्ताली बेनेट बने देश के नए प्रधानमंत्री
Photo Courtesy: Politico

यरुशलम। इजरायल में लंबे समय तक चले उठापटक के बाद आखिरकार बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता चली गई है। इजरायल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू रविवार को 12 साल बाद हटा दिया गया। इजरायल के नए प्रधानमंत्री के रूप में नाफ्ताली बेनेट ने पदभार ग्रहण कर लिया है। बेनेट ने सदन में बहुमत साबित कर दिया है।

इजरायल के 120 सदस्यीय सदन में आज बहुमत परीक्षण था। इनमें से 59 सदस्यों ने पीएम नेतन्याहू का समर्थन किया, जबकि 60 सदस्यों का समर्थन नाफ्ताली बेनेट के पक्ष में था। वोटिंग के दौरान एक सदस्य अनुपस्थित रहे। ऐसे में नाफ्ताली बेनेट बहुमत से प्रधानमंत्री चुने गए। बेनेट 27 अगस्त 2023 तक पीएम रहेंगे।

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बेंजामिन नेतन्याहू हो हटाने के लिए इजरायल की सभी विपक्षी पार्टियों को अपने राजनीतिक मतभेदों को भूलकर एकजुट होना पड़ा है। गठबंधन की सरकार में इजरायल के दक्षिणपंथी, मध्यममार्गी और वामपंथी दल शामिल हैं। गठबंधन की सरकार बनाने के लिए इन दलों में बड़ी डील हुई है। डील के मुताबिक सभी दलों ने दो-दो साल के लिए पीएम की कुर्सी पर बैठने का फैसला लिया गया है। 

करार के तहत नफ्ताली बेनेट अगले दो साल यानी सरकार बनने से लेकर 2023 तक प्रधानमंत्री रहेंगे। उसके बाद याइर लापिड को दो साल यानी 2025 तक के लिए देश की कमान संभालने का मौका मिलेगा। हालांकि, जाते-जाते बेंजामिन नेतन्याहू ने भी वापसी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने नई सरकार को खतरनाक करार देते हुए कहा कि वह गठबंधन सरकार को सत्ता से हटाए बिना चैन से नहीं बैठेंगे।

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खास बात यह है कि इस्लामिक पार्टी यूनाइटेड अरब लिस्ट ने भी इस गठबंधन का हिस्सा बनने पर सहमति जताई है। यह पहला मौका है, जब कोई अरब-इजरायली पार्टी सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बन रही है। पार्टी ने सरकार में किसी मंत्री पद की मांग नहीं की है, लेकिन अपने कुछ मुद्दों को लेकर सहमति बनाई है। ऐसे में नई सरकार को देश के 21 फीसदी अल्पसंख्यकों को भी साधकर रखना होगा। दक्षिणपंथी दलों और वामपंथी दलों में फिलिस्तीन से लेकर कई अहम मुद्दों पर गहरा मतभेद है, बावजूद सभी पार्टियां इस बार सिर्फ नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए एकजुट हुई हैं।