पाकिस्तान में 21 घंटे तक चली मैराथन शांतिवार्ता बेनतीजा, ईरानी प्रतिनिधिमंडल वापस लौटा

ईरानी दूतावास का कहना है कि अमेरिका बातचीत के दौरान समय का दबाव बना रहा था। उन्हें फैसला जल्दी चाहिए था। वहीं, ईरान धैर्य के साथ बात करना चाहता था।

Updated: Apr 12, 2026, 02:26 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच घंटों की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला है। गैर-नतीजतन वार्ता खत्म होने के बाद ईरान का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया है। इससे पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अपने देश लौटने के लिए इस्लामाबाद से निकल गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट खोलने और न्यूक्लियर प्रोग्राम पर पेंच फंसा है। यह वार्ता 21 घंटे से ज्यादा समय तक चली। वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। लौटने से पहले उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अमेरिका बिना डील के लौट रहा है। यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।

वेंस ने कहा कि किसी भी समझौते के लिए जरूरी है कि ईरान ये वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। अमेरिका की शर्तें स्पष्ट थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें नहीं माना। वेंस ने यह भी कहा कि आगे समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'हम उन्हें फाइनल ऑफर देकर जा रहे हैं। अब देखना है कि ईरान इसे मानता है या नहीं।'

बता दें कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कुल 71 लोग शामिल थे। मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरानी डेलिगेशन में पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल थे और वार्ता खत्म होने के बाद ये सभी पाकिस्तान से निकल गए हैं।

वहीं, घाना में ईरानी दूतावास ने अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'यूएस अपने उपराष्ट्रपति को आधी दुनिया पार करके इस्लामाबाद ले गया। 21 घंटे की बातचीत हुई। उन्होंने हर वो चीज मांगी जो वे जंग से हासिल नहीं कर सकते थे। ईरान ने पूरी तरह से ना कहा। बातचीत खत्म हो गई है। स्ट्रेट अभी भी बंद है और उपराष्ट्रपति खाली हाथ घर लौट रहे हैं। अब बस फिर से ईरान की बात करेंगे। उनके पास अपनी इज्जत बचाने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है।'

ईरानी दूतावास का कहना है कि अमेरिका बातचीत के दौरान समय का दबाव बना रहा था। उन्हें फैसला जल्दी चाहिए था। वहीं, ईरान लंबी रणनीति के साथ बैठा था। ईरान धैर्य के साथ बात करना चाहता था।इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने कहा कि देश अमेरिका के पिछले वादे तोड़ने को न भूला है और न भूलेगा।