फाइजर के बाद यूरोप में मॉडर्ना को भी 12-17 साल के बच्चों के टीकाकरण को मंजूरी मिली

यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने स्पाइकवैक्स कोरोना वैक्सीन का ट्रायल 3,732 बच्चों पर किया, बच्चों के शरीर में अच्छी एंटीबॉडी बनने के बाद दी गई वैक्सीनेशन की मंजूरी, तीसरी लहर के पहले बच्चों की सुरक्षा को लेकर है विश्व में चिंता

Updated: Jul 24, 2021, 01:31 PM IST

फाइजर के बाद यूरोप में मॉडर्ना को भी 12-17 साल के बच्चों के टीकाकरण को मंजूरी मिली
Photo Courtesy: Business Standard

यूरोप ने 12-17 साल के बच्चों के लिए मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन को अप्रूवल दे दिया है। यह दूसरा मौका है जब किसी कंपनी को बच्चों के वैक्सीनेशन की मंजूरी मिली है। इससे पहले यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) ने फाइजर को 12-17 साल के बच्चों के लिए अप्रूवल दिया था। यूरोपीय यूनियन की टॉप मेडिकल बॉडी ने इसे मंजूर किया है।

मॉडर्ना की स्पाइकवैक्स वैक्सीन के भी दो डोज लगाए जाएंगे। जैसे व्यस्क लोगों को लगाए जाते हैं। दो डोज के बीच में एक महीने का अंतर रखा जाएगा। स्पाइकवैक्स कोरोना वैक्सीन का ट्रायल 3,732 बच्चों पर किया गया था। ट्रायल में शामिल सभी बच्चों के शरीर में अच्छी एंटीबॉडी का निर्माण हुआ।  

12-17 साल की उम्र के बच्चों को 10 माइक्रोग्राम की दो डोज दी जाएंगी। जो की बड़ों को दी जाने वाली डोज का एक तिहाई है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन वैक्सीन्स का ट्रायल 6 महीने से ज्यादा उम्र के बच्चों पर भी किया जाएगा। वहीं यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने इस बात का खुलासा भी किया है कि बच्चों को दी जाने वाली स्पाइकवैक्स वैक्सीन 18 साल से ज्यादा वालों की दी जाने वाली ही वैक्सीन है। इसे मॉडर्ना ब्रांड नाम से उपयोग में लाया जा रहा है। यूरोपीय देशों में करीब 20 करोड़ से ज्यादा लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है।  

 

इससे पहले फाइजर और उसकी जर्मन सहयोगी बायोएनटेक की वैक्सीन को पहले ही मंजूरी मिल गई थी। फाइजर द्वारा 12-17 साल के बच्चों के वैक्सीनेशन का काम किया जा रहा है। अब एक कदम बढ़ाते हुए फाइजर ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों का ट्रायल शुरु कर दिया है। माना जा रहा है कि शुरुआती दौर में कम संख्या में छोटे बच्चों को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी। सफलता मिलने पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा। छोटे बच्चों पर वैक्सीनेशन के लिए फाइजर ने चार देशों से 4,500 से ज्यादा बच्चों का सलेक्शन कर लिया है। दरअसल कोरोना ने दुनिया भर में तबाही मचाई है। यही वजह है कि हर देश अपने-अपने स्तर पर कोरोना वैक्सीन पर काम कर रहा है।

ब्रिटेन में मई 2021 में एस्ट्राजेनेका द्वारा 6 से 17 साल तक की उम्र के बच्चों पर स्टडी शुरू की जा चुकी है। इसी कड़ी में जॉनसन एंड जॉनसन भी काम कर रहा है। वहीं चीन ने सिनोवैक ने 3 साल तक के बच्चों पर भी अपनी वैक्सीन को असरदार पहले ही बता चुका है।