दो हफ्ते में 38 देशों में फैला Omicron, इस वेरिएंट से अबतक नहीं हुई किसी की मौत: WHO 

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी मिले ओमिक्रॉन के मामले, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि अबतक इस वेरिएंट से किसी की मौत नहीं हुई, 38 देशों तक पहुंचा यह वेरिएंट

Updated: Dec 04, 2021, 09:10 AM IST

दो हफ्ते में 38 देशों में फैला Omicron, इस वेरिएंट से अबतक नहीं हुई किसी की मौत: WHO 
Photo Courtesy: Michigan Health

जिनेवा। दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला कोरोना वायरस का नया वेरिएंट बेहद तेजी से दुनियाभर में अपना पांव पसार रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को बताया कि यह Omicron वेरिएंट दो हफ्ते के भीतर 38 देशों में फैल चुका है। हालांकि, WHO ने पुष्टि की है कि इस वेरिएंट से अबतक दुनिया में किसी की मौत नहीं हुई है।

WHO के एक प्रवक्ता ने कहा की फिलहाल यह तय करने में हफ्तों लग सकते हैं कि नया वेरिएंट कितना ज्यादा संक्रामक है, यह अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है या नहीं और इसके खिलाफ कितने प्रभावी उपचार और टीके हैं। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यह अगले कुछ महीनों में यूरोप के आधे से अधिक कोरोना के मामलों का कारण बन सकता है।

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उधर अमेरिका के कई राज्यों में ओमिक्रॉन वेरिएंट फैल चुका है। कैलिफोर्निया में पहला केस सामने आने के ठीक एक दिन बाद जांच से पता चला कि ओमिक्रॉन से न्यूयॉर्क शहर में भी पांच लोग संक्रमित हैं। इसके अलावा मिनेसोटा का एक युवक भी Omicron संक्रमित पाया गया। उसने नवंबर के अंत में मैनहट्टन में एक सम्मेलन में भाग लिया था। 

अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, श्रीलंका समेत कई देशों में धीरे-धीरे नए वेरिएंट के केस सामने आने लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में तीन छात्र इस वैरिएंट से संक्रमित पाए गए हैं। उधर नॉर्वे के अधिकारियों ने बताया कि ओस्लो में एक कार्यालय के बाद कम से कम 13 लोगों में कोरोना का नया ओमिक्रॉन वैरिएंट मिला है। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्री खैरी जमालुद्दीन ने बताया कि देश में ओमिक्रॉन का पहला केस सामने आया है। श्रीलंकाई स्वास्थ्य सेवा के उपमहानिदेशक हेमंथा हेराथ ने बताया की देश में Omicron पहला मामला सामने आया है।

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इस नए वेरिएंट को लेकर इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड की निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने शुक्रवार को कहा कि यह ग्लोबल इकोनॉमी रिकवरी को भी धीमा कर सकता है। जिस तरह से डेल्टा वेरिएंट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था, उसी तरह यह स्ट्रेन भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाएगा। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका के रिसर्चरों ने 24 नवंबर को इस नए वैरिएंट के बारे में पहली बार बताया था।