BBC पर रोक लगाकर भी चीन को चैन नहीं, अब छेड़ी दुष्प्रचार की मुहिम

चीन की सरकारी प्रॉपगैंडा मशीनरी में शामिल ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में बीबीसी पर फेक न्यूज़ यानी झूठी ख़बरें फैलाने का आरोप लगाया गया है

Updated: Feb 13, 2021, 05:21 PM IST

BBC पर रोक लगाकर भी चीन को चैन नहीं, अब छेड़ी दुष्प्रचार की मुहिम
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बीजिंग। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित चैनलों में शामिल बीबीसी का अपने इलाक़े में प्रसारण रोकने के बाद चीन ने अब उसके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया है। चीन के सरकारी प्रचार तंत्र में शामिल वेबसाइट ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में आरोप लगाया गया है कि बीबीसी चीन के ख़िलाफ़ झूठा प्रचार करता है, चीन की छवि बिगाड़ने के लिए फेक न्यूज़ दिखाता है। इस लेख में इन आरोपों के ज़रिए बीबीसी पर लगाई गई रोक को सही ठहराने की कोशिश भी की गई है।

ग्लोबल टाइम्स में छपे इस लेख से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि चीन को सिर्फ बीबीसी पर रोक लगाकर ही चैन नहीं मिल रहा है। वो चैनल के ख़िलाफ़ तरह-तरह के आरोप लगाकर अपनी खीझ मिटाने की कोशिश कर रहा है। जानकारों का मानना है कि चीन की इस खीझ की दो वजहें हैं। चीन की सरकार बीबीसी की ख़बरों में चीन की असलियत उजागर किए जाने से तो पहले से चिढ़ती आ रही है। उस पर से ब्रिटेन में हाल ही में चीन की सत्ताधारी पार्टी से जुड़े न्यूज़ चैनल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया। कई जानकार मानते हैं कि बीबीसी पर रोक ब्रिटेन में हुई कार्रवाई के बदले के तौर पर भी की गई है।

दरअसल, क़रीब दस दिन पहले, 4 फरवरी को ब्रिटिश मीडिया नियामक ऑफकॉम ने चीन के चैनल सीजीटीएन का प्रसारण लाइसेंस रद्द कर दिया है। ब्रिटेन का आरोप है कि चैनल ने देश के प्रसारण नियमों का उल्लंघन किया था। ब्रिटेन के इस फैसले के बाद ही गुरुवार को चीन ने देश में बीबीसी को प्रतिबंधित करने का फ़ैसला किया।

एनआरटीए ने अपने आदेश में कहा था कि चीन पर बीबीसी वर्ल्ड न्यूज की रिपोर्ट ने ब्रॉडकास्टिंग नियमों का उल्लंघन किया, जिसमें समाचार की सत्यता, निष्पक्षता और "चीन के राष्ट्रीय हितों का उल्लंघन करना शामिल है।' माना जा रहा है कि ब्रिटेन द्वारा चीनी सरकार समर्थक चैनल का लाइसेंस रद्द किए जाने से बौखलाई चीन सरकार ने यह निर्णय लिया है। 

बीबीसी की रिपोर्टिंग से क्यों बौखलाया चीन

बीबीसी ने कुछ दिनों पहले ही चीन में वीगर मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों, ख़ास तौर पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की ख़बर विस्तार से दिखाई थी। बीबीसी ने दिखाया था कि चीन की सरकार किस तरह दस लाख से अधिक वीगर मुसलमानों को जबरन कैंप में रखकर उनके साथ जानवरों से भी बदतर सलूक कर रही है। इन कैंपों में महिलाओं के साथ सेक्स स्लेव जैसा बर्ताव किया जाता है। बीबीसी की यह ख़बर अत्याचार की भुक्तभोगी महिलाओं की आपबीती पर आधारित थी।

बीबीसी की इस रिपोर्ट से अंतराष्ट्रीय स्तर पर चीन की सरकार की काफ़ी फजीहत हुई। हालाँकि चीन की सरकार ने बीबीसी की उस ख़बर को भी बेबुनियाद और बदनाम करने की कोशिश बताते हुए ख़ारिज कर दिया था। चीन का दावा है कि बीबीसी ऐसी खबरें उसके न्याय तंत्र की बदनाम करने के लिए दिखाता है।

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इतना ही नही बीबीसी वर्ल्ड ने यह भी बताया था कि चीन की सरकार किस तरह कोरोना से संबंधित डेटा छिपा रही है। इसमें कोरोना से जुड़ी रिसर्च और देश में कोरोना पीड़ितों की संख्या की जानकारी भी है।

दुनियाभर में चीन के कदम की आलोचना

बीबीसी पर चीन में प्रतिबंध लगाए जाने की सारी दुनिया में कड़ी आलोचना हो रही है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने कहा है कि यह सच की आवाज को लोगों तक पहुँचने से रोकने की साजिश है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि चीन में स्वतंत्र रूप से काम कर रहे मीडिया संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया जाना बेहद ग़लत है और अमेरिका चीन के इस कदम का विरोध करता है।