संविधान के साथ साथ बाल हितों की रक्षा की भी शपथ लें नेता, बाल आयोग की कलेक्टरों से सिफारिश

बाल आयोग ने कलेक्टरों को अपनी सिफारिश में कहा है कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट देते वक्त बाल अधिकार संरक्षण की शपथ दिलाई जाए

Updated: Jun 24, 2022, 10:19 PM IST

संविधान के साथ साथ बाल हितों की रक्षा की भी शपथ लें नेता, बाल आयोग की कलेक्टरों से सिफारिश

भोपाल। मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों का शंखनाद हो चुका है। राज्यभर में प्रत्याशी मतदाताओं से तरह तरह के वादे कर रहे हैं। इसी बीच अब मध्य प्रदेश स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (MPCPCR) ने चुनाव जीतने पर बाल अधिकार संरक्षण को लेकर शपथ दिलाने की पहल की है।

MPCPCR ने इस संबंध में समस्त जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर जीतने वाले उम्मीदवारों से बाल अधिकार संरक्षण संबंधी शपथ पत्र भरवाने की सिफारिश की है। बाल आयोग का कहना है कि जीत के प्रमाण पत्र के साथ सभी को बाल अधिकार सुरक्षा शपथ-पत्र सौंपे जाएं। शपथ-पत्र पर जीतने वाले प्रत्याशियों के हस्ताक्षर भी लिए जाएं क्योंकि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का संरक्षण जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है।

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बाल आयोग ने कलेक्टरों को जो शपथ पत्र भेजा है उसमें लिखा है कि, 'मैं ईश्वर को साक्षी मानकर शपथ लेता/लेती हूं कि मैं अपने ग्राम पंचायत, मोहल्ला, वार्ड, जिला क्षेत्र के अंतर्गत निवासरत समस्त बच्चों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, उसकी शिक्षा सुनिश्चित करने, उनकी सुरक्षा एवं अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी एक सेवक के रूप में स्वयं लेता/लेती हूं।'

बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान ने कहा कि बाल आयोग की यह बेहद सकारात्मक पहल है और देशभर में ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य होगा। हम सभी जनप्रतिनिधियों से अपील करते हैं कि वह इस पहल को आगे बढ़ाएंगे। बच्चे इस देश का भविष्य ही नहीं बल्कि कल की नींव के पत्थर भी हैं और आगे चलकर वे मतदाता भी होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि, 'हमारे आसपास गांवों और शहरों में नौनिहालों के साथ कई तरह की घटनाएं होती रहती हैं। जागरुकता के अभाव में यह देखने में आता है कि लोग इन घटनाओं के संबंध में मदद के लिए आगे नहीं आते हैं, जबकि एक सामाजिक व्यक्ति होने के नाते प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह बच्चों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा करे। 

चौहान ने बताया कि इससे पहले बाल आयोग ने यह सुझाव निर्वाचन आयोग को दिया था। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा था कि हम संवैधानिक रूप से जीते हुए प्रत्याशियों को किसी भी शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। बहते होगा कि आयोग यह अनुशंसा जिला कलेक्टरों को भेजे जो इन चुनावों में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाते हैं।