टीचर बनने महिला ने छोड़ दी सरपंच की कुर्सी, 256 वोट से जीता था सरपंच का चुनाव

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में एक महिला सरपंच ने टीचर की नौकरी करने के लिए सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया।

Updated: Apr 30, 2023, 11:10 AM IST

टीचर बनने महिला ने छोड़ दी सरपंच की कुर्सी, 256 वोट से जीता था सरपंच का चुनाव

बड़वानी। चुनाव लड़ने के लिए अक्सर लोग अपने सरकारी पदों से इस्तीफा दे देते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में इसके विपरित कहानी देखने को मिली है। यहां एक महिला सरपंच ने टीचर बनने के लिए सरपंच की कुर्सी छोड़ने का फैसला लिया है। महिला सरपंच ने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया।

अंजड़ के ग्राम पंचायत बिल्वारोड की 33 वर्षित महिला सरपंच मंजू राठौर ने शुक्रवार को सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया। मंजू राठौर का कहना है कि यह त्याग उन्होंने बच्चों के भविष्य के लिए किया है। उन्होंने कहा, 'मेरा सपना शुरू से ही टीचर बनने का रहा। हालांकि 8 माह पहले हुए चुनाव में मैंने परिवार के कहने पर चुनाव लड़ा, जिसमें मुझे जीत भी हासिल हुई। मैने 256 मतों से जीत दर्ज की थी। लेकिन अब मेरा सिलेक्शन टीचर के लिए हो गया है, इसलिए अपने सपने को जीने के लिए मैंने सरपंच की कुर्सी छोड़ दी है। कुर्सी सपनों से बड़ी नहीं होती।'

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जानकारी के मुताबिक बिल्वारोड ग्राम पंचायत में 1100 मतदाता हैं। पिछले साल 1 जुलाई को हुए चुनाव में करीब 1000 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। 15 जुलाई को परिणाम आए, जिसमें मंजू की 256 मतों से जीत हुई थी। इस बीच मंजू का चयन 25 किमी दूर ग्राम दानोद के प्रायमरी स्कूल में शिक्षक के रूप में हो गया। शुक्रवार को मंजू अपने पति के साथ टिकरी जनपद पंचायत सीईओ के पास पहुंची और पंचायत इंस्पेक्टर की उपस्थिति में अपना त्यागपत्र सौंप दिया। अब मंजू शिक्षिका के तौर पर गांव चोतरियां में नौकरी ज्वाइन करेंगी।

अपने फैसले को लेकर मंजू राठौर ने कहा, 'मुझे बिल्वारोड के ग्रामीणों ने करीब 8 माह पहले सरपंच चुना था। सरपंच रहते हुए मैं गांव के विकास कार्यों को कराने में जुटी रही। इस बीच मैंने संविदा शिक्षक वर्ग तीन की परीक्षा दी। जब परीक्षा का रिजल्ट आया तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था, लेकिन एक दुविधा थी कि सरपंच बनकर गांव की तस्वीर बदलूं या फिर शिक्षक बनकर बच्चों का भविष्य संवारू। काफी सोच विचार के बाद मैंने सरपंच का पद छोड़ने का फैसला लिया।' बहरहाल, मंजू राठौर के इस फैसले की पूरे जिले में चर्चा हो रही है।