शिवराज सरकार ने बदला एक और ऐतिहासिक धरोहर का नाम, मिंटो हॉल हुआ कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति हॉल

मध्य प्रदेश में जारी नाम बदलने की सियासत, सीएम शिवराज ने किया ऐलान, अब कुशा भाऊ ठाकरे के नाम से जाना जाएगा ऐतिहासिक धरोहर मिंटो हॉल

Updated: Nov 27, 2021, 09:54 AM IST

शिवराज सरकार ने बदला एक और ऐतिहासिक धरोहर का नाम, मिंटो हॉल हुआ कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति हॉल
बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के लिए सजा मिटो हॉल

भोपाल। उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार द्वारा नाम बदलो अभियान चलाया जा रहा है। हबीबगंज के बाद प्रदेश सरकार ने एक और ऐतिहासिक धरोहर का नाम बदलने का फैसला लिया है। राजधानी भोपाल स्थित मिंटो हॉल अब कुशा भाऊ ठाकरे स्मृति हॉल के नाम से जाना जाएगा। बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का समापन करते हुए सीएम शिवराज ने शुक्रवार देर शाम यह ऐलान किया।

मुख्यमंत्री ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, 'हम जहां बैठे हैं इसका नाम है मिंटो हॉल। अब आप बताओ ये धरती अपनी, ये मिट्टी अपनी, ये पत्थर अपने, ये गिट्टी अपनी, ये चूना अपना, ये गारा अपना, ये भवन अपना, भवन बनाने वाले मजदूर अपने, ये पसीना अपना और नाम मिंटो का? इस भवन में कई लोग बैठे थे, उन्हें यहां तक और लोकसभा तक पहुंचाने वाले शख्स का नाम कुशाभाऊ ठाकरे है। जिन्होंने ये नेता गढ़े, जिन्होंने ये कार्यकर्ता बनाए, जिन्होंने पूरे प्रदेश में वट वृक्ष के रूप में BJP को खड़ा किया। मिंटो हॉल का नाम उन कुशाभाऊ ठाकरे के नाम पर रखा जाएगा।'

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बता दें कि मध्य प्रदेश की पुरानी विधानसभा रही मिंटो हॉल को अंग्रेजी हुकूमत के दौरान तैयार किया गया था। माना जाता है कि तत्कालीन लॉर्ड मिंटो जब भोपाल आए थे तो उन्हें राजभवन में ठहराया गया था। लॉर्ड मिंटो को वहां की व्यवस्था पसंद नहीं आई और वे नाराज हो गए थे। इसके बाद भोपाल की तत्कालीन रानी सुल्तानजहां बेगम ने एक भव्य इमारत बनाने का निर्णय लिया। सन 1909 में लॉर्ड मिंटो ने ही इस भवन की नींव रखी थी। इसे बनाने में तकरीबन 25 साल लग गए और इसे बेगम के बेटे नवाब हमीदुल्ला खान ने पूरा करवाया। तब से ही इस भवन को मिंटो हॉल के नाम से जाना जाता है।

हालांकि, सीएम शिवराज के ऐलान के बाद इसका नाम अब कुशा भाऊ ठाकरे स्मृति हॉल हो गया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस इमारत को अब कुशा भाऊ ठाकरे के रंग रूप और स्वभाव के अनुरूप विकसित किया जाएगा। ऐसा में अब माना जा रहा है कि यहां जो बियर बार है उसे भी हटाया जाएगा। बता दें कि एमपी सरकार बीते कुछ समय से नाम बदलने में काफी दिलचस्पी ले रही है। इसके पहले हबीबगंज जंक्शन का नाम बदलकर रानी कमलापति कर दिया गया वहीं सीएम शिवराज एक अन्य स्टेशन का नाम टंट्या भील के नाम पर करने का ऐलान कर चुके हैं।

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राज्य सरकार के इन फैसले की आलोचना भी हो रही है। सोशल मीडिया यूजर्स कह रहे हैं कि सरकार को नई इमारतें बनवाकर महापुरुषों के नाम पर रखना चाहिए। लेकिन सरकार के पास अपनी कोई उपलब्ध नहीं है जिसका नाम वे अपने हिसाब से रख सकें। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। सलूजा ने पूछा है कि ठाकरे का क्या योगदान है। उनका योगदान सिर्फ बीजेपी के लिए ही है।