ठगों को पकड़ने झारखंड के जामताड़ा गई भोपाल पुलिस पर किया ग्रामीणों ने हमला, जामताड़ा के 308 गांवों से चलता है ठगी का कारोबार

भोपाल पुलिस दो आरोपियों को पकड़कर अपने साथ भोपाल लाई है, आरोपियों ने पुलिस के समक्ष कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं, मसलन ठगी के कारोबार में आरोपियों को पूरे गांव वालों का समर्थन हासिल है, जो जितना बड़ा ठग होता है, उसकी गांव में उतनी ही पूछ परख होती है

Publish: Jul 04, 2021, 10:27 AM IST

ठगों को पकड़ने झारखंड के जामताड़ा गई भोपाल पुलिस पर किया ग्रामीणों ने हमला, जामताड़ा के 308 गांवों से चलता है ठगी का कारोबार

भोपाल। ऑनलाइन ठगी की शिकायत मिलने के बाद झारखंड के जामताड़ा में आरोपियों को पकड़ने गई भोपाल पुलिस पर हमला कर दिया गया। पुलिस की टीम पर हमला महिलाओं ने किया था। महिलाओं ने पुलिस की गाड़ी पर तोड़फोड़ भी की। हालांकि हमले के बावजूद पुलिस दो आरोपियों को अपने साथ पकड़कर लाने में कामयाब हो गई। 

बीते दिनों भोपाल पुलिस को ठगी की शिकायतें मिली थीं। भोपाल पुलिस ने शिकायत की जब पड़ताल की तब पुलिस को आरोपियों की लोकेशन झारखंड के जामताड़ा में मिली। इसके बाद भोपाल पुलिस की दस सदस्यीय टीम जामताड़ा पहुंच गई। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने आरोपियों को सचेत कर दिया। पुलिस के पहुंचते ही महिलाओं की फौज पुलिस की टीम पर टूट पड़ी। 

पुलिस दोनों आरोपियों को पकड़कर भोपाल लाई है। दोनों आरोपियों ने पुलिस के सामने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। झारखंड के जामताड़ा में करीब 308 गांवों से ठगी का यह कारोबार पूरे देश में चलता है। ठग झारखंड के बाहर के ही लोगों को अपने शिकार बनाते हैं। मुख्यतः यह लोगों के खातों से पैसे चट कर जाने का काम करते हैं। 

ठगों की इस ठगी में ग्रामीणों का समर्थन हासिल है ही साथ ही बैंक के कर्मचारी भी ठगी में इनका साथ देते हैं। ठग बाहरी राज्यों के लोगों से ठगी कर ग्रामीणों की समय समय पर मदद करते हैं। जिस वजह से ग्रामीण अमूमन पुलिस आने की भनक लगते ही ठगों को सूचित कर देते हैं। जिसके बाद यह ठग जंगल में छिप जाते हैं। 

ठगों के इलाके में उन्हें एटीएम मास्टर के नाम से जाना जाता है। उनके क्षेत्र में लोगों के खातों से पैसा उड़ाने को अपराध नहीं माना जाता। इसके एक वजह यह भी है कि ये ठग अपनी ठगी का शिकार आस पास के लोगों को नहीं बनाते। बल्कि कभी जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को आर्थिक सहायता भी करते हैं। 

जिन सिम कार्ड से यह लोगों को फोन करते हैं, वह भी झारखंड का नहीं होता। सभ सिम कार्ड ओडिशा और पश्चिम बंगाल से लाए जाते हैं। ठगों के इस कार्य में बैंक के कर्मचारी भी शामिल हैं। बैंक के कर्मचारी उन्हें ग्राहकों के लिए शुरू की गई योजनाओं के बारे में बताते हैं। जिसके बाद उन योजनाओं का नाम लेकर ठग उन्हें चूना लगाते हैं। 

ठगी के शिकार खाताधारकों के खाते से पैसा निकालते ही ये ठग पहले एक खाते में पैसे ट्रांसफर करते हैं, फिर इसी तर्ज पर उन पैसों को दूसरे और तीसरे एटीएम में ट्रांसफर किया जाता है। तीसरे एटीएम से पैसे निकालकर, एटीएम को उसी समय तोड़ दिया जाता है।